बदायूं। जिले के परिषदीय विद्यालयाें के लिए करोड़ों रुपये आते हैं, फिर भी बच्चे जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में विज्ञान प्रयोगशाला में कबाड़ का सामान रख उसे रसोई के रूप इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, कक्षा एक से तीसरी तक के छात्रों को किताबें अब तक नहीं मिल पाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शहर के कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को की गई पड़ताल में विज्ञान प्रयोगशाला में रसोई चलती मिली। स्कूल का अन्य टूटा फूटा कबाड़ का सामान भी प्रयोगशाला में ही रख दिया गया। जब विद्यालय की प्रधानाध्यापक मेहर जबीन से इसका कारण पूछा तो वह कबाड़ रखने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाईं।
वहीं, नगर क्षेत्र का सरांय फकीर प्राथमिक विद्यालय काफी जर्जर अवस्था में है। विद्यालय की छत पर घास उग आई है। बारिश के दिनों में तो छत से पानी टपकता है। शौचालय गंदे पड़े हुए हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापक रुचि वार्ष्णेय बताती हैं कि स्कूल का भवन ब्रिटिश काल में बना था जो अब पूरी तरीके से जर्जर है। उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या भी बनी रहती है।
एक कमरे में एक से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई
कुबूलपुरा न.2 प्राथमिक विद्यालय के एक ही कमरे में एक से पांचवीं तक की कक्षाओं की पढ़ाई होती है। बच्चों का खाना भी इसी कमरे में बनकर तैयार होता है। प्रधानाध्यापक ने कहा कि स्कूल में कुल 42 बच्चे पंजीकृत हैं। अभी तक विद्यालय में कक्षा एक से तीसरी तक की किताबें नही पहुंची हैं।
बच्चों को नहीं मिला किताबों का पूरा कोर्स
उसावां क्षेत्र के ग्राम भवन नगला के प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक 54 बच्चे पंजीकृत हैं। कक्षा चार व पांच के बच्चों को केवल चार-चार किताबें मिली हैं, पूरा कोर्स नहीं मिला है। कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को किताबें अभी नहीं मिली हैं। इस वजह से कई बच्चे विद्यालय नहीं जा रहे। खड़ंजा नहीं होने से बारिश के दिनाें में सड़क पर पानी भर जाता है। जिसके कारण बच्चों को विद्यालय आने-जाने में परेशानी होती है।
कोट,
विद्यालयों की अव्यवस्थाओं को दिखवाया जाएगा। वैसी भी ज्यादातर विद्यालय किराये के भवन में संचालित हैं। शिक्षकों की भी कुछ मजबूरियां हैं। स्कूलों की संख्या बढ़ने से भी समस्याएं आ रही हैं। जल्द ही किताबें पहुंचेंगी।
वीरेंद्र कुमार, बीएसए