बदायूं। स्कूल जाने वाले पांच से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोर-किशोरियों में एनीमिया की पहचान की जाएगी। जांच के बाद प्रत्येक बच्चे की रिपोर्ट को स्वास्थ्य विभाग के आरबीएसके 2.0 पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बच्चों और किशोरों में खून की कमी की समस्या को शुरुआती स्तर पर पहचानना जरूरी है। कई बार एनीमिया के लक्षण स्पष्ट दिखाई नहीं देते, जिससे समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की मोबाइल हेल्थ टीमें स्कूलों में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान बच्चों की जांच करेंगी। वहीं, किशोर स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य संबंधी परामर्श या उपचार के लिए पहुंचने वाले बच्चों और किशोर-किशोरियों की भी हीमोग्लोबिन जांच की जाएगी।
जांच में खून की कमी पाए जाने पर संबंधित बच्चे को आवश्यक उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज होने से स्वास्थ्य विभाग के पास बच्चों की जांच और उपचार का डिजिटल रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा। इससे यह निगरानी करने में मदद मिलेगी कि कितने बच्चों की जांच हुई, कितने में एनीमिया पाया गया और कितने बच्चों को उपचार दिया गया।
विभाग का जोर जांच के साथ-साथ एनीमिया से प्रभावित बच्चों का नियमित फॉलोअप करने पर भी रहेगा। इस संबंध में आरबीएसके अधिकारी डॉ. राजवीर गंगवार का कहना है, इससे किशोर-किशोरियों में एनीमिया के बारे में पता चल सकेगा, ताकि समय रहते उपचार किया जा सके।