बदायूं। गुस्सा हर किसी को आता है, लेकिन गुस्से पर काबू रख पाने से ही व्यक्ति बेहतर इंसान बनता है। ऐसी ही सोच इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की है। इसके लिए उसने आदेश दिए हैं कि अब स्कूलों को क्रोध मुक्त जोन (एंगर फ्री जोन) बनाया जाएगा। स्कूल में चाहें शिक्षक हो, स्कूल कर्मचारी हो या फिर अन्य कोई भी व्यक्ति क्यों न हो, हर किसी को स्कूल में अपने गुस्से पर काबू रखना होगा। वह छात्र-छात्राओं से बेहतर तरीके से बात करेगा। चाहें उनकी गलती ही क्यों न हो।
केंद्र सरकार ने हाल ही में फिट इंडिया अभियान की शुरूआत की है। इसके पीछे उसका मानना है कि शरीर की फिटनेस का सीधा संबंध दिमाग के साथ होता है। एक फिट दिमाग ही एक रचनात्मक दिमाग होता है और वह समाज में योगदान देने में सक्षम हैं, जबकि गुस्सा फिटनेस के लिए काफी हानिकारक है। इससे तमाम तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने सभी स्कूलों को एंगर फ्री जोन बनाने का फैसला लिया है। इसको लिए बोर्ड ने सर्कुलर जारी किया है। इसमें निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूलों में एंगर फ्री जोन बनाया जाए। स्कूल प्रबंधनों के अनुसार, शिक्षकों को इसकी जानकारी दी जा रही है।
ऐसे होगा एंगर फ्री जोन-
बच्चों को ‘क्रोध से मुक्ति’ का मूल्य सिखाने का सबसे अच्छा तरीका खुद का उदाहरण देना है। इसके लिए स्कूलों से कहा गया है कि सभी लोग बच्चों से हंसकर और सौम्य तरीके से बात करें। हमेशा मोबाइल फोन की ओर न देखते रहें। मन की शांति के लिए स्कूलों में ब्रीदिंग एक्सरसाइज कराई जाए और सभी लोग 20 मिनट का वक्त खुद के लिए दें। सीबीएसई का मानना है कि इससे बच्चे डर, अनादर, दुखी होने से दूर रहेंगे और मानसिक रूप से और सक्रिय हो सकेंगे।
स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा के लिए रखा जाएगा निश्चित समय
-सीबीएसई बोर्ड ने निर्देश दिए है कि स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा के लिए रोजाना एक निश्चित समय तय किया जाए, जिसका समय विद्यालय अपनी सुविधा के अनुसार तय करेंगे। इसमें बच्चों से प्यार से सीधा संवाद किया जाए। इससे गुस्सा कम होगा और एक अच्छा माहौल बनेगा।
गुस्सा करने से ये होता है स्वास्थ्य पर असर
- क्रोध आने पर मस्तिष्क में ऐसे रासायनिक तत्व बनते हैं, जिनका शरीर और मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
- आंखें लाल हो जाती हैं तथा सीने में जलन हो सकती है।
- ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।
-आक्रामक भावनाएं उत्पन्न होती हैं।
-सोच-विचार की शक्ति कमजोर हो जाती है।
- तनाव बढ़ता है।
- लगातार क्रोध करने से पाचन तंत्र कमजोर होता है।
- क्रोध से नींद नहीं आती, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है।
-सीबीएसई की तरफ से ये बेहतर सर्कुलर जारी किया है। इससे बच्चों को काफी फायदा मिलेगा। बच्चों में अक्सर देखा गया है कि कभी कभी विभिन्न कारणों से उनके अंदर एक चिड़चिड़ापन सा आ जाता है, जो धीरे-धीरे गुस्से में बदल जाता है।
-प्रतिभा सिंह
-सीबीएसई द्वारा यह अच्छी पहल है। अगर स्कूल प्रबंधन में इस पर पूरी तरह से फोकस किया, तो बच्चों में बेहतर सुधार देखने को मिलेगा, जो आज के समय में बेहद जरूरी है।
- रितु
बोले प्रधानाचार्य-
-सीबीएसई की तरफ से जो सर्कुलर जारी किया, उससे छात्र-छात्राओं पर काफी प्रभाव पड़ेगा। स्कूलों में अमूमन देखने में आता है कि जैसे ही छात्र-छात्रा गलती करते हैं, तो उन्हें डाटा जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब उन्हें प्यार से समझाया जाएगा कि उनके द्वारा क्या गलती की गई है। निश्चित ही इसके सकारात्मक प्रभाव होंगे।
-डॉ. श्यामेश, प्रधानाचार्य, टिथोनस इंटरनेशनल स्कूल
बच्चों को मार-पीटकर कुछ भी नहीं समझाया जा सकता है, लेकिन प्यार से हर काम मुमकिन किया जा सकता है। सीबीएसई की तरफ से यह गाइड लाइन जारी की गई है। उसमें इसी पर फोकस किया गया है कि बच्चों को डांटे नहीं, बल्कि मुस्कुराकर समझाने की कोशिश करें।
-नीरज त्यागी, प्रधानाचार्य केंद्रीय विद्यालय
एंगर फ्री जोन बनाने के लिए सीबीएसई की तरफ से गाइड लाइन जारी की गई है। इसके बाद में सभी को अवगत कराया जा रहा है, ताकि वे सीबीएसई के सर्कुलर पर अमल कर सकें। इसमें स्कूल स्टाफ व शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी छात्र या छात्रा पर क्रोधित नहीं होंगे और उनसे मुस्कुराकर ही बात करेंगे।
-पवित्रा यादव, जिला कोआर्डिनेटर सीबीएसई