गंगा पार के स्कूलों में शिक्षण कार्य के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाई जा रही है। कुछ गांवों में स्कूल भवन बाढ़ में बह चुके हैं। बावजूद इसके इन स्कूल भवनों के मेंटीनेंस का बाकायदा बिल पड़ रहा है और उनका भुगतान भी हो रहा है। शिक्षकों ने दैनिक मजदूरी के हिसाब से विकल्प के तौर पर गांव के ही युवाओं को बच्चों को पढ़ाने के लिए रख लिया है। सवाल उठ रहा है कि जब भवन ही नहीं हैं तो पढ़ाई हो कहा रही है।
क्षेत्र पंचायत उसावां में ग्राम कमलइय्यापुर, जटा, रैपुरा नवीन, रैपुरा और कदमनगला गंगा के दूसरी पार हैं। इन गांव में प्राथमिक विद्यालय और कदमनगला में पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें कमलइय्यापुर, जटा और रैपुरा नवीन के स्कूल भवन पिछली बार आई बाढ़ में कट गए थे। भवन न होने के बाद भी कागजों में शिक्षण कार्य तो लगातार चल ही रहा है इन अज्ञात हो चुके भवनों के रखरखाव का पैसा भी विभाग से निकाला जा रहा है।
इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों ने पढ़ाने के लिए गांवों के ही युवाओं को दैनिक मजदूरी के हिसाब से रख रखा है जो कुछ बच्चों को झोपड़ियों में बैठाकर पढ़ाई की औचपारिकताएं निभा रहे हैं। इसके साथ ही एमडीएम में भी घपला किया जा रहा है।