मौसम ने इस पखवाड़े तीसरी बार मिजाज बदला है। चैत्र कृष्ण पक्ष में सावन जैसे नजारे देखने को मिल रहे हैं। बिजली की गड़गड़ाहट के साथ बरसात हो रही है। ये मौसम किसानों की फसलों पर कहर बनकर टूट रहा है। पहले गेहूं, सरसों और मसूर को बेकार किया तो इस बार आलू की फसल पर कहर बरपा दिया। रात में चली तेज हवाओं ने अन्य फसलों को भी तबाह किया है। बारिश के कारण शहर में किचकिच रही, वहीं बाजारों में सन्नाटा छाया पसरा रहा।
मौसम के मिजाज बिगड़े तो लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। जो लोग बाहर निकले तो भीगे बिना न रह सके। बारिश के कारण तापमान भी चार डिग्री सेल्सियस गिर गया। पूरे दिन बादल बने रहे और दोपहर से ही बारिश ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। रात को फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली हवाएं चलीं। होली के बाद भी भी मौसम सर्द है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी मौसम का विपरीत प्रभाव पड़ा है।
पिछली बार 17 हेक्टेयर फसल की तबाह
इस पखवाड़े तीसरी बार मौसम ने किसानों पर जुल्म ढाए हैं। पिछली बार में मौसम के कारण 50 प्रतिशत से अधिक 17 हजार हेक्टेयर फसलें तबाह हुईं। नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से नुकसान का आंकलन किया गया। सबसे अधिक नुकसान गेहूं, सरसों और मसूर को हुआ। इस बार आलू भी नुकसान की चपेट में हैं। गेहूं की फसल का एरिया 2.46,000 हेक्टेयर, सरसों का 30,000 हेक्टेयर, मसूर पांच हजार हेक्टेयर में है। आलू की फसल भी जिले में करीब 25 हेक्टेयर में है।
फसल बीमा कराने वालों को मिलेगा लाभ
जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने बताया कि जिले में गोष्ठियों के माध्यम से फसल बीमा के बारे में किसानों को जागृत किया जाता रहा है। फिर भी किसान कम संख्या में फसल बीमा कराते हैं। पिछले नुकसान में केवल 4500 किसानों को बीमा का लाभ मिलेगा। इनका 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। लगभग आठ प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ है।