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संसार में सर्वोच्चता वाला शब्द है मां: राजेंद्र यादव

Sun, 11 Jan 2015 08:28 PM IST
badaun
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संत निरंकारी मंडल के साप्ताहिक सत्संग में पहुंचे धर्म प्रेमियों को नर से नारायण तक की यात्रा के तमाम गूढ़ विषय बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि स्वयं के दुखों का मनन पाप कर्म बनाता है और संसार के दुखों का मनन व निराकरण सत्कर्म बनाता है।
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अलापुर रोड स्थित सत्संग भवन में राजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि संसार में सर्वोच्चता वाला शब्द मां कहलाता है। मां से जुड़ने वाले शब्द जैसे- महात्मा, आत्मा, परमात्मा, देवी मां आदि सभी पूज्य होते हैं। कहा कि मानव परमपिता की सर्वोच्च रचना है। मानव रूप में सती अनुसुइया ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश को बच्चा बना दिया था। सत्संग में शास्त्रों की चर्चा होती है, जिससे मानव को अपनी ज्ञानेन्द्रियों पर शासन करना आता है। आगे बताया कि मनुष्य  के पाप मनसा, वाचा, कर्मणा तीनों प्रकार शरीर में पांचों इंद्रियों के माध्यम से ही घुसते हैं।
सत्संग में वक्ता श्री यादव ने कहा कि कीड़ा फूल का संग करके भगवान के चरणों तक पहुंच जाता है, इसलिए अच्छी संगत करें। अभिमन्यु को चक्रव्यूह का ज्ञान गर्भ से, प्रहलाद को भक्ति का ज्ञान गर्भ से, अष्टावक्र को शासकों का ज्ञान गर्भ से हुआ। लिहाजा गर्भ को संभालने की जरूरत है। कहा कि आत्मा के सात गुण हैं- शांति, सुख, शक्ति, प्रेम, पवित्रता, ज्ञान और आनंद। अंत में बाबा हरदेव सिंह के जयकारे लगे। सत्संग में एके चौहान, डोरीलाल, राजपाल, तिलक चंद्र, अनिल गुप्ता, विनोद रावत आदि थे।
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