नोटबंदी के पचास दिन बीतने के बाद भले ही राष्ट्रीयकृत बैंकों में ग्राहकों को राहत मिलने लगी हो, लेकिन क्षेत्रीय बैंकों के हालात अभी भी नहीं सुधर सकें हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी ग्राहकों को एक-दो हजार देकर टरका दिया जा रहा है। शुक्रवार को कस्बे की सर्व यूपी ग्रामीण बैंक में पैसे न दिए जाने से नाराज कुछ ग्राहकों ने शोरशराबा भी किया।
लाइन में लगे ग्राहकों ने बताया कि वह रोजाना धक्के खाने को मजबूर हैं। बावजूद इसके पर्याप्त कैश नहीं दिया जा रहा है। कभी-कभी तो कैश खत्म होने की बात कह दी जाती है, तो कभी बमुश्किल एक-दो हजार दिया जाता है। शाखा प्रबंधक पीके जैन ने बताया कि जितना कैश बैंक को प्राप्त हो रहा है। उतना ग्राहकों को दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पर्याप्त कैश की उपलब्धता न होने से दिक्कत आ रही है।
ग्राहकों को नहीं होने दी जा रही कोई असुविधा
बदायूं। सर्व यूपी ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पर विमुद्रीकरण के उपरांत शाखाओं पर भुगतान की स्थिति के संबंध में शाखाओं पर नकदी की सुलभता व कृषकों को किए जा रहे भुगतान की समीक्षा की गई। शाखाओं पर नकदी के प्रवाह तथा भुगतान के संबंध में फीड बैक भी लिया गया। शाखा प्रबंधकों ने बताया कि उनकी शाखाओं पर खातेदारों, ग्रामीणों, गन्ना कृषकों को अनवरत रूप से प्रत्येक कार्यदिवस में भुगतान किए जा रहे हैं। ग्राहकों को कोई असुविधा नहीं होने दी जा रही है। इस दौरान क्षेत्रीय प्रबंधक डीके वर्मा, वीरेंद्र कुमार सक्सेना, आलोक आहूजा, पीके सक्सेना, विनोद कुमार, डीडी शर्मा, अजय कुमार सक्सेना, मनोज जौहरी, बीबी जौहरी, वीपी सिंह आदि मौजूद रहे।