उझानी (बदायूं)। दिल्ली से चलकर कहां-क्या करना है। मोबाइल कहां फेंकना है, हत्या कैसे करनी है। यह पूरी स्क्रिप्ट सरताज ने तीन दिन पहले ही तैयार कर ली थी। निदा बार-बार मना कर रही थी, लेकिन सरताज के बहानों के आगे निदा की एक न चली। बुधवार को हत्या के जुर्म में सरताज को जेल भेज दिया गया।
कासगंज में सहावर क्षेत्र के गांव बुधारी कलां निवासी निदा के पिता शफीक आलम, चाचा गुलजार मियां और बुआ सीमा ने घटना के दूसरे दिन बताया कि सरताज ने पहले ही तय कर लिया था कि निदा को दिल्ली से बदायूं लेकर आना है। निदा के चाचा गुलजार दिल्ली के रघुवीरनगर इलाके में रहते हैं। दो-तीन गली आगे सरताज किराये के मकान में रहता है।
सरताज के साथ बदायूं आने से पहले सोमवार दोपहर निदा चाची शायरा के पास गई और बताया कि मानकपुर में कोई काम नहीं है फिर भी सरताज उसे जबरन वहां ले जा रहा है। सरताज ने उससे कहा था कि मां-बाप के बारे में बुरा सपना देखा है। ससुराल आने के लिए निदा ने चाची से सोने के कुंडल भी ले लिए थे।
इकलौती बेटी की हत्या से गमजदा शफीक ने कहा कि वह सोच भी नहीं सकते कि जिस लड़की की शादी इतनी धूमधाम से की वही लड़का उनकी बेटी का कत्ल कर देगा। इसके आगे वह कुछ नहीं बोले, खामोश हो गए। शफीक व परिवार वालों का कहना है कि सरताज ने बेहद शातिराना अंदाज में घटना को अंजाम दिया। तीन दिन पहले ही उसने हत्या करने की तैयारी कर ली थी। इसके बाद एकाएक मंगलवार को निदा से कहा कि उसे बहुत बुरा सपना आया है। रात में ही बदायूं चलना है। निदा के लाख मना करने के बाद भी वह नहीं माना। चाकू व सर्जिकल ग्लव्स उसने अपने पास ही छिपाकर रखे थे।
50 लाख रुपये से अधिक मूल्य की है शफीक की जमीन
चाचा गुलजार मियां ने बताया कि सरताज की नजर निदा के पिता की तीन बीघा जमीन पर भी थी। आबादी वाले क्षेत्र में होने की वजह से जमीन की कीमत करीब 50 लाख रुपये है। शफीक तो जमीन सरताज के नाम करना चाहते थे लेकिन निदा ने मना कर दिया था। उसने कहा सरताज का व्यवहार उसके प्रति अच्छा नहीं है जमीन नाम हो जाने के बाद वह कुछ भी कर सकता है। इसके बाद ही शफीक का मन बदल गया।
गांव के लोगों को देख बदल ली बस
मानकपुर के कई लोग दिल्ली में काम करते हैं। वह सरताज को जानते हैं। सोमवार देर शाम सरताज और निदा आनंद बिहार बस अड्डे से रोडवेज की जिस बस में सवार हुए उसमें उसी के गांव का एक युवक भी सवार हो गया। यह देख सरताज निदा को लेकर बस से उतर गया और बदायूं आ रही दूसरी बस में सवार हो गया। सरताज को डर था कि गांव के इस युवक की वजह से उसकी प्लानिंग न फेल हो जाए।