-बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने किया स्नान, पूजा-अर्चना भी की
अमर उजाला ब्यूरो
सहसवान। नगर के प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल सरसोता पर होली से पहले फाल्गुन मास की एकादशी को लगने वाले दो दिवसीय मेले का शुभारंभ ग्रामीणों ने बुधवार को एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर किया। यह पौराणिक मेला है और इससे क्षेत्र की पहचान है। सांसद धर्मेंद्र यादव के अथक प्रयासों से इस ऐतिहासिक सरोवर का जीर्णोंद्धार कराए जाने से यह धरोहर अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पवित्र कुंड में स्नान कर पूजा अर्चना भी की। इस दिन से ही होली खेलना प्रारंभ हो जाता है।
श्रद्धालुओं ने हनुमान मंदिर में पूजा कर मन्नतें मांगी। कई वर्ष पहले एकादशी मेले में हाथी, ऊंट, घोडा दौड़ और दंगल हुआ करता था। इसे देखने के लिए दूर दराज से सैकड़ों की संख्या में लोग आया करते थे। ऊंट और हाथी दौड़ होना तो गुजरे जमाने की बात हो गई है। पौराणिक कथा के अनुसार सरसोता की उत्पत्ति भगवान परशुराम के फरसे से हुई थी। राजा सहस्त्राबाहु से भगवान परशुराम का युद्ध इसी स्थान पर हुआ था। युद्ध के दौरान जब परशुराम को प्यास लगी तो उन्होंने अपने फरसे से पृथ्वी पर एक-एक कर सात प्रहार किए, इससे पृथ्वी के गर्भ से जल की सात अलग-अलग निर्मल धाराएं फूट पड़ी, क्योंकि यह जल स्त्रोत सीधे पृथ्वी से फूटे थे। इस कारण सरसोता में पानी कम नहीं होता था और सातों धाराओं का तापमान अलग अलग रहता था। वक्त के साथ सरसोता के दुर्दिन शुरू हो गए। धीरे धीरे स्त्रोतों से पानी आना बंद हो गया और श्रद्धालुओं ने भी आना कम कर दिया। सांसद धर्मेंद्र यादव और ग्राम्य विकास मंत्री ओमकार सिंह यादव के प्रयासों से वीरान पड़े सरसोता पर फिर से रौनक लौट आई है। श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए धर्मशाला निर्माण के साथ समुचित व्यवस्था की गई है। मेले में पुलिस व्यवस्था भी चौकस रही।