पुलिस और औषधि प्रशासन विभाग ने सेंपल की दवाइयों की तस्करी करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) और एक दूधिया शामिल है। दवाइयों को तस्करी दूधिया के जरिए ड्रम में रखकर की जा रही थी। बरामद दवाओं की कीमत का आंकलन करने में औषधि प्रशासन विभाग जुटा हुआ है। बताया जा रहा है बरामद दवाओं की कीमत करीब 40 हजार रुपये है। ड्रग इंस्पेक्टर पवन कुमार शाक्य की ओर से सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में वन विभाग रोड पर महेश नाम के युवक का चाय का होटल है। इसी ओर न्यायालय का पूर्वी गेट भी है। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे जखेली गांव का निवासी दूधिया अमर सिंह यहां दूध लेकर पहुंचा। उसके एक ड्रम में दवाइयां भरी हुई थीं। दूधिया ने दूध देने के लिए ड्रम खोला तो यहां मौजूद वकीलों ने उसके ड्रम में दवाइयों की खेप देख ली। दूधिया से पूछताछ की तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। वकीलों ने सिविल लाइंस थाना पुलिस को खबर दी। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। मामला दवाइयों का होने की वजह से इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अशोक कुमार ने इस बारे में ड्रग इंस्पेक्टर पवन कुमार शाक्य को बताया।
खबर मिलने पर ड्रम इंस्पेक्टर पहुंच गए। उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि दूधिया के ड्रम में सेंपल की दवाइयां भरी हुई थीं। इन पर ‘नॉट फोर सेल’ लिखा हुआ था। कुल 2700 टेबलेट बरामद हुईं। पूछताछ करने पर दूधिया ने बताया कि बिसौली निवासी एमआर देवेश ने उसको यह दवाइयां एक स्थान पर पहुंचाने के लिए दी गई थीं। पुलिस ने दूधिया से देवेश को बुलवाया। दोनों को हिरासत में ले लिया गया। ड्रग इंस्पेक्टर पवन कुमार शाक्य की ओर से सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई
चाय की दुकान से होती थी दवाओं की तस्करी
बदायूं। वन विभाग रोड पर चाय की दो दुकानें हैं। इन दोनों दुकानों से ही सेंपल और सरकारी दवाइयों की तस्करी होती है। पास में ही जिला अस्पताल और करीब आधा दर्जन मेडिकल भी हैं। पिछले दिनों जिला अस्पताल में दवा गोदाम से हजारों टेबलेट गायब हो गई थीं। इस मामले में शाकिर नाम के फार्मासिस्ट पर गाज गिरी थी। इन दवाइयों की भी इसी तरह से तस्करी कर दी गई थी।
दवा कंपनियों को एमआर लगा रहे चूना
बदायूं। दवा कंपनियों की ओर से सेंपल के रूप में डॉक्टर को बिना शुल्क दवा मुहैया कराई जाती है। कंपनियों के एमआर इन दवाइयों को डॉक्टर को न देकर ब्लैक कर देते हैं। सेंपल की दवाओं की ब्लैक का यह पहला मामला नहीं है। 2013 में भी एक मामला पकड़ा गया था। उस वक्त एक मेडिकल स्टोर से करीब 80 हजार रुपये की सेंपल की दवाइयां बरामद की गई थीं। पिछले साल शहर के संतोख सिंह तिराहे के पास से एक मेडिकल से नशीली दवाओं की खेप भी पुलिस ने बरामद कर मेडिकल संचाल को जेल भेजा था।
सेंपल की दवाओं की तस्करी करते हुए दो लोगों को पकड़ा गया है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बरामद दवाओं की कीमत कितनी है? इसका आकलन किया जा रहा है। कुल 27 सौ पेन किलर टेबलेट बरामद की गई हैं।
-पवन कुमार शाक्य, औषधि निरीक्षक