शासन के निर्देश पर बनाई गई जिले के माफिया के सूची में सत्तारूढ़ पार्टी के भी कुछ नेता शामिल हैं। एलआईयू के सूत्रों की मानें तो जमीनों पर अवैध कब्जों के मामले में ज्यादातर असरदार लोग सत्तारूढ़ दल से जुड़े हैं। खनन के मामले में भी सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ नेताओं का नाम आया है। गन्ना माफिया के रूप में एक पूर्व विधायक का नाम सामने आया है।
पिछले दिनों शासन ने जिला स्तर पर माफियाओं की सूची मांगी थी। सूची बनाने का जिम्मा स्थानीय अभिसूचना इकाई को दिया गया था। सूत्रों की मानें तो स्थानीय खुफिया विभाग ने शराब माफिया, खनन माफिया, भू-माफिया, गन्ना माफिया की सूची तैयार कर ली है।
स्थानीय अभिसूचना इकाई की ओर से तैयार सूची से जाहिर है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े रहने के कारण जिले में अवैध खनन बंद नहीं हो पा रहा है। दातागंज रोड पर पिछले दिनों तहसीलदार ने अवैध खनन का बड़ा मामला पकड़ा था, जिसे बाद में दबा दिया गया। सूत्रों ने बताया कि यहां भी सत्ता पक्ष के एक नेता का दखल था।
छवि चमकाने का इरादा
बदायूं। माफिया की सूची बनाने के पीछे माना जा रहा है कि सपा ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाएगी, जो सत्ता के नाम पर माफियागीरी कर रहे हैं। सूत्र इसे 2017 के चुनाव से पहले यूपी सरकार की छवि को चमकाने की कवायद मान रहे हैं।