स्थानीय लोग परेशान
इंटरचेंज पर तैनात अधिकारी राकेश ने बताया कि सुरक्षा दीवारें गांव वाले तोड़ देते हैं। कंपनी के अधिकारियों ने भी ग्रामीणों को ही दीवार तोड़ने का जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की है, लेकिन टूटी दीवारों की मरम्मत नहीं हुई। इससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने जल्द मरम्मत और नियमित निगरानी की मांग की है ताकि पशु एक्सप्रेसवे पर न आएं।
एक किलोमीटर तक अंधेरा, हादसे का डर
बिनावर इंटरचेंज से टोल प्लाजा तक लाइटें लगी हैं, लेकिन टोल के बाद प्रयागराज की ओर एक किलोमीटर तक अंधेरा रहता है। एक्सप्रेसवे जैसे हाईस्पीड कॉरिडोर पर हर 50 से 100 मीटर पर लाइट होनी चाहिए। यहां एक लाइट से दूसरी लाइट की दूरी करीब एक किलोमीटर है। रात में तेज रफ्तार वाहनों के लिए यह स्थिति खतरनाक है। अंधेरे में गोवंश या अन्य वाहन दिखाई न देने से हादसे का खतरा बना रहता है।