दर्जनों प्रार्थना पत्र जानकारी के अभाव में हो जाते हैं वापस
सूचना का अधिकार वर्ष 2005 में मिल गया। जहां कुछ जनसूचना अधिकारियों की शिथिलता ने सूचना याचियों को छकाया, तो कुछ इस कानून में नए नियम दाखिल होने के कारण हर आम और खास सूचना अधिकार से गुमराह हुए। पर्याप्त प्रचार के अभाव में लागू किए गए सूचना मांगने के प्रोफार्मा के बारे में लोगों को जानकारी नहीं हो पाती और उनके प्रार्थनापत्र वापस हो जाते हैं।
वैसे तो सूचना अधिकार के तहत सूचनाएं दिए जाने के मामले में बदायूं मंडल का टॉप जिला बन गया है। बावजूद इसके तमाम लोग सूचना अधिकार से वंचित भी हुए हैं। तमाम लोगों की सूचना निर्धारित सूचना प्रपत्र पर नहीं होने के कारण वापस कर दी गई हैं। गत वर्ष एक अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 528 लोगों ने सूचना अधिकार का प्रयोग कर सूचनाएं हासिल की थीं, वहीं इस वर्ष 21 जनवरी से 12 अगस्त तक 343 लोग सूचना अधिकार का इस्तेमाल कर चुके हैं। बदायूं सूचना अधिकार के क्रियान्वयन में मंडल के टॉप जिलों में शामिल है। बावजूद बदले नियमों के कारण तमाम लोग इस अधिकार का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि अमर उजाला ने बदले नियमों की जानकारी भी प्रकाशित की थी, जिसमें सूचना अधिकार के तहत अब निर्धारित प्रारूप पर ही सूचना मांगी जा सकती है।
दूसरी कठिनाई यह है कि लोग संबंधित विभाग के जनसूचना अधिकारी से निर्धारित प्रारूप पर सूचना नहीं मांगते। डीएम को जिले का जन सूचना अधिकारी मानकर सीधे उनके कार्यालय में सूचना याचिका पत्र थमा आते हैं। ऐसी सभी सूचना याचिकाएं वापस हो जाती हैं या दफ्तरों में यहां से वहां पहुंचाने में विलंब में फंस जाती हैं। डीएम जन सूचना अधिकारी नहीं हैं, वह उनसे ऊपर रेवन्यू के अपीलीय अधिकारी होते हैं। इसलिए रेवन्यू से संबंधित सूचना संबंधित एडीएम (जनसूचना अधिकारी) को दी जानी चाहिए। बाकी विभागों में हर एक का एक जनसूचना अधिकारी निर्धारित है। सभी विभागों को निर्देश हैं कि अपने कार्यालय के बाहर जन सूचना अधिकारी का पद नाम और मोबाइल नंबर लिखकर लोगों को दिग्भ्रमित होने से बचाएं।
-----
अब कार्यालय में होंगे इस कानून से जुड़े दो रजिस्टर
बदायूं। जनसूचना अधिकार कानून से जुड़े दो रजिस्टर हर कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें एक पर जहां सूचना अधिकार के तहत प्राप्त प्रारूप में जन याचिका का पंजीकरण होगा, वहीं दूसरे में ऐसे जन सूचना याचिकाओं को उल्लिखित किया जाएगा जो किसी कारण विशेष से वापस की जाएंगी।
------
याची ले चुके हैं राज्य सूचना आयोग की शरण
बदायूं। जिले ने भले ही जन सूचना आयोग की रिपोर्टिंग में मंडल में पहला स्थान बना लिया है लेकिन तमाम विभाग ऐसे हैं जहां जन सूचना देने में लापरवाही की जाती है। इन हालातों में लोगों ने राज्य सूचना आयोग की शरण ली है। कई अधिकारियों पर 25000 रुपये तक का जुर्माना भी हुआ है। इसमें राजस्व, पूर्ति, शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं।