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दारोगा जैसा रौब गालिब नहीं कर सकेंगे एचसीपी

Tue, 03 Mar 2015 07:49 PM IST
badaun
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पुलिस के हेड कांस्टेबल अब दरोगा जैसा रौब गालिब नहीं कर सकेंगे। डीजीपी कार्यालय से इस संबंध में आदेश आ गया है। एचसीपी के कंधों पर डबल स्टार और सर पर पी-कैप के दिन जल्द लद जाएंगे। शासन ने माना है कि पुलिस में सहायक उप निरीक्षक का पद स्वीकृत नहीं है। सूबे के डीजीपी एके जैन ने स्पष्ट किया है कि अगर एचसीपी उप निरीक्षक की वर्दी पहनता है, तो यह शासन की मंशा के अनुरूप नहीं है।
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दरअसल, सितंबर 1997 में तत्कालीन डीजीपी ने एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा था कि जो एचसीपी सराहनीय रूप से 14 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं वह सब इंस्पेक्टर की वर्दी के साथ एक स्टार लगा सकते हैं। इसके बाद दिसंबर 2012 में तत्कालीन डीजीपी ने ऐसे आरक्षियों के लिए भी यह व्यवस्था लागू कर दी जो उप निरीक्षक के समान ग्रेड वेतन 4200 रुपये पा रहे थे। इन एचसीपी को कुछ मामलों में विवेचना के साथ आरोपियों का सुराग लगाने और गिरफ्तारी का अधिकार भी दिया गया था। इसके लिए एचसीपी को पीटीसी भी जरूरी थी। छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद ग्रेड वेतन 4200 रुपये का लाभ बड़ी संख्या में कांस्टेबलों को मिलाने लगा।
डीजीपी के 1997 और 2012 के आदेश को ऐसे एचसीपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस पर शासन से जवाब मांगा। इसके बाद डीजीपी ने पुलिस विभाग को सर्कुलर जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मात्र वेतनमान के आधार पर एचसीपी को उप निरीक्षक की वर्दी पहनने का अधिकार और कार्य लिया जाना शासनादेश की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। डीजीपी कार्यालय से 21 फरवरी को जारी नए सर्कुलर में साफ किया गया है कि पुलिस बल में एएसआई का पद स्वीकृत नहीं है। ऐसे में एचसीपी एक स्टार और सब इंस्पेक्टर की वर्दी का इस्तेमाल नहीं कर सकते। न ही गोल कैप लगा सकते हैं। वह वही कैप लगा सकते हैं, जो संशोधित नियमावली में अनुमन्य है।
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