बदायूं। भैया दूज पर इस बार लोकल मार्गों पर पिछली बार की अपेक्षा कम रोडवेज बसें संचालित की गईं। हालांकि अच्छाई यह रही कि जो 86 बसें संचालित थीं, वह खटारा नहीं थीं। बसों की संख्या कम होने के कारण त्योहार मनाने जाने वाले यात्रियों को सीट पाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। वहीं ट्रेन में भी भीड़ रही। यात्रियों की भीड़ का फायदा डग्गामार वाहनों ने भी उठाया।
भैया दूज पर बृहस्पतिवार सुबह छह बजे से ही बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ लगना शुरू हो गई। बता दें कि परिवहन निगम के बेड़े में 102 तो 44 अनुबंधित बसें शामिल हैं। 60 बसें दिल्ली रूट पर चलीं, जबकि अन्य 86 बसों को लोकल रूट पर लगाया गया। इसके बाद भी लोकल रूट पर यात्रियों को बसों का घंटों इंतजार करना पड़ा।
बसों में सीट को लेकर काफी मारामारी रही। जैसे ही स्टैंड पर बस पहुंचती, उसमें बैठने के लिए यात्रियों की भीड़ दौड़ पड़ती। हाल यह हुआ कि सीट पाने के लिए लोग बसों की खिड़की से भीतर घुसते नजर आए। परिवहन निगम का बसों की संख्या बढ़ाए जाने का दावा यात्रियों की संख्या के आगे नाकाफी साबित हुआ।
वहीं कई मार्गों पर जाने के लिए घंटों बसों का इंतजार करना पड़ा। इसका फायदा डग्गामार वाहनों के चालकों को मिला। रोडवेज बस और ट्रेन में भीड़ देखकर लोकल की सवारियों ने डग्गामार वाहनों का सहारा लिया। अपराह्न दो से शाम चार बजे तक लोकल रूट पर खासी भीड़ दिखी। पूरे दिन हाईवे पर डग्गमार वाहन भी क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाए दौड़ते रहे। बरेली, चंदौसी, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, आगरा, अलीगढ़ रूट पर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रही।
पिछले साल भैया दूज पर दौड़ीं थीं 183 रोडवेज की बसें
बदायूं। पिछले साल भैया दूज पर 183 बसों ने दौड़ लगाई थी। उस समय निगम की 139 व अनुबंधित 44 बसें थीं। 38 बसें खटारा होने के बाद इस साल डिपो से बाहर कर दी गईं। इस साल मात्र 102 निगम की और 44 बसें अनुबंधित ही दौड़ीं। इसमें 60 बसें दिल्ली रूट पर, जबकि 86 बसें लोकल रूट पर लगाईं गईं। इसके बाद भी मुरादाबाद, दातागंज, बिल्सी, उसावां, उसहैत, कादरचौक, कुंवरगांव आदि रूटों पर बसों का टोटा रहा है। संवाद
मुरादाबाद के लिए नहीं मिली रोडवेज बस
एक घंटे से बस के इंतजार में खड़े हैं, मुरादाबाद के लिए बस ही नहीं है। करीब 20 यात्री भटक रहे हैं। प्राइवेट वाहन भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में कोई डग्गामार वाहन से ही जाना पड़ेगा। - पवन, बदायूं
बच्चों का साथ है भीड़ में चढ़ ही नहीं पा रहे
मुरादाबाद जा रहे हैं। बच्चों का साथ है। रोडवेज की बसें नहीं हैं। करीब एक घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं। छोटे बच्चे हैं, बस के अलावा डग्गामार से नहीं जाना चाह रहे हैं। -विकास, कादचौक
आगरा के लिए एक घंटे से बस नहीं
बरेली से आए हैं, आगरा जाना है। उम्मीद ही नहीं थी कि बस के लिए इंतजार करना पड़ेगा। करीब एक घंटे से बस के इंतजार में बैठे हैं। रोडवेज बसों का इंतजाम सही नहीं है। - शेखर, बरेली
ड्यूटी पर पहुंचना है, बस है नहीं
आगरा में टैंट का काम करते हैं। रात को ड्यूटी पर पहुंचना है, लेकिन यहां आगरा के लिए रोडवेज की बसें ही नहीं हैं। एक घंटे से इंतजार कर रहे हैं। पता नहीं कब तक बस आएगी। पूछताछ केंद्र पर भी कोई बताने को राजी नहीं है। - शारिक, बदायूं
शेखर।- फोटो : 1
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