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नदी सूखी तो इसके किनारे भी हो गए %बेनूर%

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बदायूं। सोत नदी के पानी को इसके स्रोतों के चलते इतना पवित्र माना जाता था कि लगभग पांच दशक पूर्व तक गंगा स्नान पर्व पर बिसौली क्षेत्र के श्रद्धालु इसमें डुबकी लगाया करते थे। वहीं पाठकपुर-फतेहपुर व स्वरूपपुर के जमींदार सदानीरा किनारे बैलदौड़ व घुड़दौड़ के शौक के चलते विशाल मेले का आयोजन कराते थे। नदी सूखी तो इसके किनारे भी बेनूर हो गए। अब तो यहां झाड़ झंकांड़ खड़े हैं।
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सदानीरा का पानी इसके स्रोतों के कारण बहुत पवित्र माना जाता था। बिसौली तहसील क्षेत्र के हजारों लोग सोत नदी में स्नान करने में खुद को सौभाग्यशाली समझते थे। बुजुर्गों के अनुसार गंगा स्नान के मौके पर नदी तट पर क्षेत्र के अलावा दूरदराज के इलाकों से हजारों लोग यहां स्नान करने आते थे। इस मौके पर सोत किनारे मेले का आयोजन होता। जिससे सैकड़ों लोगों को रोजगार भी प्राप्त होता था। नदी के सूखने के बाद यहां मेला लगना बंद हो गया। बताते हैं कि दशकों पूर्व क्षेत्र के पाठकपुर-फतेहपुर के जमींदार हामिद अली और स्वरूपपुर के जमींदार मोहम्मद शफी को घुड़सवारी और बैलदौड़ का बेहद शौक था। इसी शौक के चलते दोनों जमींदार सोत नदी के किनारे मेला लगवाकर घुड़दौड़ व बैलों की दौड़ का आयोजन कराते थे। आयोजन के लिए सदानीरा किनारे को इसलिए चुना गया, क्योंकि क्षेत्रवासी व जानवरों को पीने के पानी के लिए प्याऊ आदि की व्यवस्था नहीं कराना पड़ती थी। बुजुर्गों के मुताबिक उक्त आयोजन को देखने के लिए हजारों की तादाद में आसपास के क्षेत्रों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती थी। जैसे-जैसे सोत में पानी सूखता गया वैसे वैसे मेलों का आयोजन भी ठंडा पड़ता गया। आज अपना अस्तित्व खो चुकी सदानीरा अवैध कब्जों का शिकार हो चुके ‘किनारों’ को ढूंढ रही है।
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