बदायूं। मुरादाबाद के जौधा से निकलने वाली सोत नदी की कुल लंबाई कहने को तो 220 किलोमीटर है, मगर कुछ ही हिस्से में यह नदी लगती है। ज्यादातर हिस्सा तो नाले में बदल चुका है या फिर सूखा नजर आता है। जगह-जगह जल स्त्रोतों के कारण अस्तित्व में आई इस नदी में जब कचरा फेंके जाने लगा तो ये स्त्रोत बंद होते चले गए और यह सूखती चली गई। नतीजा यह हुआ कि नदी के सूखे हुए हिस्सों पर लोगों ने कब्जा कर लिया।
जिले में कभी अपनी निर्मल धारा के रूप में पहचान रखने वाली सोत नदी आज अपने अस्तिव को लगभग खो चुकी है। मुरादाबाद का जौधा इसका उद्गम स्थल माना जाता है, क्योंकि जौधा से पहले सोत नदी का कहीं भी अस्तिव सामने नहीं आता है। इस नदी की सबसे खास बात यह है कि इसके खुद के कई प्राकृतिक जलस्त्रोत हैं, जिसकी वजह से इसमें हमेशा पानी हमेशा बहता रहता था।
बदायूं में इस नदी का 105 किलोमीटर का हिस्सा है। बिसौली, बिल्सी, सदर और दातागंज तहसील से होकर निकलने वाली यह नदी उसावां के नौलीफतुआबाद गांव पहुंचती है और इसके बाद मेें शाहजहांपुर की सीमा में प्रवेश कर जाती है। बिसौली के बझेड़ा गांव से जिले में प्रवेश करने वाली सोत नदी अब अधिकांश जगहों पर नाले का रूप ले चुकी है, तो कहीं-कहीं तो यह स्थिति है कि यह नदी बिल्कुल गायब ही दिखती है। बदायूं में तो अब इसका अस्तित्व ही खत्म हो गया है।
लोगों की मानें तो सोतनदी के पास रहने वाले ग्रामीण ही इसकी सफाई करते रहते थे, ताकि नदी के स्रोत खुले रहे और पानी लगातार बहता रहे। लेकिन समय के साथ पॉलिथीन, कूड़ा-कचरा नदी में आने लगा। इसकी वजह से हल्के-हल्के सोतनदी के स्रोत बंद होने लगे। इसकी वजह उसका पानी कम होने लगा। आज के समय में नदी की हालत यह है कि यह बस कहीं-कहीं ही नाले के रूप में बह रही है।
नदी के पास से हरियाली भी हुई गायब
सोतनदी में जब से पानी आना बंद हुआ है, तब से नदी के किनारे होने वाली हरियाली भी गायब होने लगी है। हालात यह है कि अब इस नदी में पानी नहीं होने की वजह से जानवरों तक को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है।
बिसौली से जिले में करती है प्रवेश
सोतनदी बिसौली तहसील के बझेरा गांव से जिले मेें प्रवेश करती है। इसके बाद अन्य गांव होती हुई बिल्सी तहसील के रयपुरा, सदर तहसील के जलामई, दातागंज के मूलखेड़ा से होती हुई उसावां के नौलीफतुआबाद गांव में खत्म होती है। उसके बाद में शाहजहांपुर सीमा शुरू हो जाती है।
सोत नदी की मौजूदा स्थिति के बारे में शासन को अवगत कराया जाएगा। इसके पुनर्जीवन के लिए शासन से दिशा निर्देश मांगे जाएंगे। उसके अनुरूप यहां आगे काम किया जाएगा। हालांकि पूर्व में भी कुछ क्षेत्रों में इसके लिए प्रयास किए गए हैं आगे भी इसे जारी रखा जाएगा। पूरा प्रयास रहेगा कि नदी पुनर्जीवित हो सके और किसानों को इसका लाभ मिले। -दिनेश कुमार सिंह, डीएम