करीब दो महीना से नई दिल्ली के एम्स में भर्ती रिमझिम की जिंदगी की डोर अंतत: गुरुवार तड़के टूट गई। ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित आठ साल की मासूम का आपरेशन भी सफल रहा था लेकिन गुरुवार तड़के हालत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने देखा और फिर उसे मृत घोषित कर दिया। शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया।
नगर के मोहल्ला अयोध्यागंज निवासी मुकेश पाराशर की आठ साल की बेटी रिमझिम उस वक्त लोगों की दुआ और मदद की हकदार बनी जब डॉक्टरों ने उसके दिमाग में ट्यूमर घोषित किया था। उसके इलाज के लिए तमाम लोगों ने सहयोग किया। उसकी जिंदगी के लिए दुआ भी की गई थी। मददगारों और सामाजिक संगठनों गूंज सामाजिक जन कल्याण शिक्षा समिति और रोटरी क्लब उझानी क्लासिक की ओर से भी रिमझिम की सलामती को खुले दिल से सहयोग किया गया। यहां तक कि मददगार दिल्ली तक पहुंचे।
रिमझिम को उसके पिता ने 20 नवंबर को नई दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया था। बकौल मुकेश, आपरेशन के करीब 20 दिन बाद रिमझिम ने आंखें खोली तो उसे चैन मिला। बीमारी के दौरान आंखों की रोशनी प्रभावित होने के बावजूद वह घरवालों को पहचानने लगी थी। हालांकि एम्स के डॉक्टरों ने लंबा इलाज बताया था लेकिन गुरुवार तड़के उसने अंतिम सांस ली तो मां-बाप बिलखने लगे। एम्स की औपचारिकताओं के बाद शाम को रिमझिम का शव घर पहुंचा तो घरवालोें की हालत देख हरेक आंख नम हो गई। बता दें कि मासूम के इलाज के लिए उसके पिता की गुहार को अमर उजाला ने अपने संवेदनशील पाठकों तक पहुंचाया था।