खराब और रीबोर लायक हैँडपंपों को ठीक कराने के पहले जहां बजट का रोना रोया जा रहा है, वहीं इन्हें ठीक कराने के लिए जिले में ब्लाकवार कोटा निर्धारित किया गया है। इससे जिले की प्यास बुझाने में आगे अड़चनें जरूर आएंगी। इसमें नेतागीरी चलेगी।
जिले में 37023 हैंडपंप हैं। इनमें 2046 हैंडपंप रीबोर लायक हैं। इसके बावजूद जिले में 750 हैंडपंप रीबोर कराने ही प्रस्तावित किए गए हैं। दरअसल, इसके लिए ब्लाकवार कोटा बनाया गया है। हर ब्लाक के 50 हैंडपंप रीबोर हो सकेंगे। इस प्रकार सभी 15 ब्लाकों में 750 हैंडपंप रीबोर होने हैं। इस प्रकार आधे भी रीबोर लायक हैंडपंप ठीक नहीं हो सकेंगे। 1296 रीबोर लायक हैंडपंप ऐसे ही पड़े रहेंगे। इस प्रकार जिले की गर्मियों में प्यास बुझना मुश्किल हो जाएगा।
गत वर्ष भी था कोटा जो दोगुना हुुआ
रीबोर के लिए चिह्नित हैंडपंपों को ठीक कराने के लिए गत वर्ष भी कोटा निर्धारित किया गया था। जिलाधिकारी ने जब देखा कि निर्धारित कोटा के हिसाब से काम करने पर बड़ी तादाद में हैंडपंप रीबोर को रह जाएंगे तो उन्होंने इसके लिए कोटा ठीक दोगुना कर दिया गया। इससे करीब 1500 हैंडपंप सही हो गए और लोगों को गर्मी के मौसम में राहत मिली।
ब्लाकवार 50 हैंडपंप रीबोर का कोटा निर्धारित हुआ है। इससे अधिक हैंडपंप होंगे तो ठीक नहीं किए जाएंगे। इसी हिसाब से रीबोर को धन मिलेगा। - एसके गुप्ता, एक्सईएन, जल निगम