दिसंबर में धान खरीद में तेजी लाने को तीन संस्थाएं और बढ़ाई गई थीं। इसके बावजूद जिले में धान खरीद का लक्ष्य 14 हजार मीट्रिक टन काफी दूर है। तीन एजेंसी और 10 खरीद केंद्र और बढ़ा दिए गए हैं। छह एजेंसी और 31 खरीद केंद्र हो जाने के बाद भी खरीद मात्र 4894.2 मीट्रिक टन ही हो सकी है। तीन महीना खरीद के निकल चुके हैं, बाकी रहे हैं 28 दिन तो इनमें खरीद का लक्ष्य पहाड़ लांघने जैसा है।
धान खरीद को तेज बनाने के लिए प्रशासन ने कर्मचारी कल्याण निगम को तीन, यूपी एग्रो को चार और उप्र आवश्यक वस्तु निगम (एसएफसी) को तीन क्रय केंद्र दिए हैं। इन संस्थाओं को दिसंबर से ही खरीद शुरू कर देनी चाहिए थी लेकिन इनमें एक कर्मचारी कल्याण निगम ने अभी एक दाना खरीद नहीं की है। अभी ठेकेदारों के लिए टेंडर ही हो सके हैं।
दिसंबर से पहले तीन संस्थाओं के थे 10 केंद्र
विपणन शाखा अपने छह केंद्र, पीसीएफ 10 केंद्र और उपभोक्ता भंडार निगम पांच केंद्रों पर खरीद कर रही है। इस प्रकार पहले जहां तीन संस्थाएं 21 क्रय केंद्रों पर खरीद कर रही थीं, वहीं अब 10 केंद्र और बढ़ जाने से अब छह संस्थाएं 31 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद हो रही है।
पीसीएफ ने नहीं निभाई जिम्मेदारी
सबसे अधिक 10 खरीद केंद्र पीसीएफ पर हैं। मार्केटिंग का इसके बाद नंबर आता है। इसके छह केंद्र हैं। सबसे अधिक खरीद पीसीएफ की होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं है। मार्केटिंग के कम सेंटर होने के बावजूद इनकी खरीद 2085.3 मीट्रिक टन है तो पीसीएफ 1265 मीट्रिक टन की धान खरीद सका है।
अब तक की धान खरीद
मार्केटिंग-6 2085.3 मीट्रिक टन
पीसीएफ-10 1265.0 मीट्रिक टन
यूपीएसएस-5 1235.0 मीट्रिक टन
एसएफसी-3 175.9 मीट्रिक टन
यूपी एग्रो-4 133.0 मीट्रिक टन
ककनिगम-3 000.0 मीट्रिक टन
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छह संस्था-31 4894.2 मीट्रिक टन
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धान खरीद बढ़े इसी रणनीति के तहत केंद्र और संस्थाएं बढ़ाई हैं। बाकी दुश्वारियों को भी दूर किया जाएगा। धान खरीद में किसी को लापरवाह नहीं बनने दिया जाएगा। - राजेंद्र प्रसाद यादव, एडीएम वित्त/ धान खरीद प्रभारी