बदायूं। सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नई सराय निवासी गुलफाम ने एक जनवरी को ससुरालियों और पुलिस की कार्रवाई से तंग आकर एसएसपी कार्यालय में खुद को आग लगा ली थी। 14 जनवरी को गुलफाम की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
पुलिस ने गुलफाम की मौत से पहले उसकी तहरीर के आधार पर पत्नी सनोबर बी, उसके साले निहाल, मुनाजिर, साकिर, इकरार, इसरार, जैब, शाहरुख, दिनेश और रफीउद्दीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें सदर कोतवाली पुलिस सभी दस आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसके बाद गुलफाम के परिजन एसएसपी से मिले।
उन्होंने मांग की थी कि मजिस्ट्रेट को मृत्यु पूर्व दिए बयान के आधार पर सिविल लाइंस थाने में दर्ज मुकदमे में भी आरोपियों के नाम बढ़ाए जाएं, जिससे वह जेल में ही रहें। पुलिस ने मजिस्ट्रेट को दिए गए बयानों की कॉपी मंगाई। इसमें पाया गया कि गुलफाम ने मजिस्ट्रेट को मृत्यु पूर्व जो बयान दिए थे उसमें अपनी पत्नी का नाम नहीं लिया था, बल्कि शेष सभी आरोपी व एक रिजवान का नाम लिया था। इसके चलते पुलिस ने गिरफ्तारी से बचे रिजवान को भी पकड़कर बुधवार को जेल भेज दिया। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने बताया कि सभी के नाम पूर्व मेंं दर्ज मुकदमे में बढ़ाते हुए फरार चल रहे रिजवान को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। सभी की रिमांड ली जाएगी।