गेहूं क्रय केंद्रों पर पिछले सालों केंद्रों की व्यवस्था ऐसी रही कि कहीं तो किसानों की गेहूं बेचने को भीड़ लगती रही तो कोई सेंटर खाली ही पड़े रहे। इसकी वजह थी कि क्रय केंद्रों की सीमा तय कर रखी गई थी। पहली बार शासनादेश के तहत किसान अब किसी भी सरकारी गेहूं खरीद केंद्र पर अपना गेहूं बेच सकता है। भले ही वह ब्लाक और जिला की सीमाओं से अलग हो। नए आदेशों पर सीमा निर्धारण हटाकर एक तरह से गेहूं खरीद की लक्ष्मण रेखा को लांघकर किसान अपना गेहूं किसी भी केंद्र पर बेच सकेगा।
जिले में गेहूं का लक्ष्य बढ़ाकर 1.33 लाख एमटी रखा गया है। पिछले वर्ष केवल 85 हजार एमटी लक्ष्य था। गेहूं खरीद में केंद्रों की सीमाओं को खत्म करने से गेहूं की खरीद लक्ष्य आसानी से पाया जा सकता है। माना जाता है कि यही वजह है कि गेहूं खरीद का लक्ष्य ज्यादा बढ़ा कर भेजा गया है। लक्ष्य बढ़ाए जाने के पीछे इस बार की गेहूं फसल अच्छी होना भी बताया जाता है। सीमा मुक्ति गेहूं खरीददारों को भी अच्छा साबित होगी। पड़ोसी जिलों के इंटीरियल इलाके अपने जिले से लगे होने के कारण अधिकतर पड़ोसी जिलों के किसानों का गेहूं बदायूं की सीमा ही बिकेगा।
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सीमा मुक्ति से इन इलाकों पर पड़ेगा फर्क
बदायूं। गेहूं खरीद में सीमा मुक्ति हो जाने से जिले के सीमावर्ती इलाकों में बड़ा फर्क पड़ेगा। दातागंज क्षेत्र जहां शाहजहांपुर की सीमा से जुड़ा है, वहीं कादरचौक क्षेत्र से फर्रुखाबाद, कासगंज, सहसवान से कासगंज और संभल, इस्लाम नगर क्षेत्र से संभल, आसफपुर क्षेत्र से मुरादाबाद और रामपुर, कुंवरगांव क्षेत्र से बरेली जिले की सीमाएं प्रभावित होती हैं। इनसे लगे क्रय केंद्रों पर दोनो ओर किसान अपना गेहूं बेच सकेंगे। यहां बता दें सुविधाओं में जो जिला इन सीमावर्ती केंद्रों को आगे रखेगा, वहीं सबसे अधिक गेहूं आएगा।
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इस बार पहली बार सीमा बंधन मुक्त गेहूं खरीद हो रही है। पहला प्रयोग है, किसानों को इससे भारी सुविधा होगी। इस प्रयोग के अच्छे परिणाम आने की उम्मीद है।
-कौशलेंद्र वर्मा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी