जांच में खंगाले गए 1924 से 1964 तक के राजस्व अभिलेख
मुख्यमंत्री के कार्यक्रमस्थल में चंदोखर तालाब के कुछ हिस्से को पाटकर मिलाए जाने संबंधी विवाद पर जिला प्रशासन ने विराम लगा दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट का एडीएम प्रशासन, एडीएम वित्त एवं राजस्व और बदायूं के अधिशासी अधिकारी ललतेश सक्सेना द्वारा संयुक्त परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में का गया है कि 1924 से 1964 तक के राजस्व अभिलेखों के अनुसार कार्यक्रमस्थल विभिन्न काश्तकारों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं। यहां कहीं तालाब अंकित नहीं हैं, खसरे में इन खेतों में फसलों का उल्लेख रहा है।
जिलाधिकारी सीपी त्रिपाठी के आदेश पर नगर मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर, तहसीलदार की तीन सदस्यीय समिति से जांच में अभिलेख खंगाले गए। ज्ञात हुआ कि 1952 की खतौनी, प्रथम बंदोबस्त फसली वर्ष 1331, सन 1924, और द्वितीय बंदोबस्त फसली 1371, सन् 1964 के अनुसार कार्यक्रम स्थल का गाटा विभिन्न काश्तकारों के नाम अभिलेखों में अंकित है। अभिलेखों में इस स्थल पर तालाब अंकित नहीं है। 1952 के खसरे में भी इस स्थल पर काश्तकारों के नाम दर्ज हैं और खसरे में फसलों का इंद्राज है। जांच में स्पष्ट कर दिया गया है कि संबंधित स्थल पर तालाब नहीं है, बल्कि शहर की बड़ी आबादी की नालियों का पानी भर जाता है। जिलाधिकारी ने बताया कि जांच समिति के अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ताओं और स्थानीय निवासियों के बयान अंकित किए गए हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा बताया गया कि जिस स्थान की शिकायत की गई है वह जगह प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर है। बता दें कि 23 मई को मुख्यमंत्री के जिला भ्रमण कार्यक्रम में दातागंज तिराहे के समीप विज्ञानंद इंटर कॉलेज के निकट मैदान को चयनित किया गया है। इस मैदान की भूमि के संबंध में कुछ लोगों के द्वारा यह शिकायत की गई कि कार्यक्रम स्थल के निकट स्थित चंदोखर तालाब के कुछ हिस्से को पाटकर मिलाया गया है। जिलाधिकारी द्वारा प्राप्त शिकायतों का संज्ञान लेते हुए समिति गठित कर जांच कराई गई थी।
...पर सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी कहां से आई?
बदायूं। जिला प्रशासन की रिपोर्ट को सही मान लिया जाए तो सवाल ये भी उठता है कि तालाबनुमा जगह को पाटने के लिए सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी कहां से और किनकी अनुमति से आ रही है। जब मिट्टी खनन पर रोक लगी है, ऐसे में दिन-रात कई एकड़ में फैली तालाबनुमा जमीन को कहां से खनन कर लाई जा रही मिट्टी से पाटा जा रहा है। रात-दिन आबादी के बीच से मिट्टी भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलने पर क्षेत्रीय लोगों ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने प्रदर्शन भी किया था। लोगों का कहना है कि इस मामले की भी जांच होनी चाहिए कि भराव कैसे हो रहा है।