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UP News: बदायूं के इस मंदिर में होती है लंकापति रावण की पूजा, दशहरा पर जुटते हैं सैकड़ों लोग

Tue, 23 Sep 2025 02:33 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

दशहरा पर्व पर जहां रावण के पुतले जलाकर लोग परंपरा निभाते हैं। वहीं बदायूं शहर के मोहल्ला साहूकारा स्थित एक अनोखा मंदिर में है, जहां रावण की पूजा की जाती है। इस मंदिर में दशानन रावण की प्रतिमा भी स्थापित है। 
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बदायूं के मोहल्ला साहूकारा में स्थित मंदिर में रावण की प्रतिमा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दशहरा आते ही देशभर में रावण दहन की तैयारियां शुरू हो गई है। असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक इस पर्व पर रावण के पुतले जलाकर लोग परंपरा निभाते हैं। वहीं, बदायूं शहर के मोहल्ला साहूकारा स्थित एक अनोखा मंदिर इस परंपरा से अलग है। यहां दशहरा के दिन रावण की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की जाती है। यही वजह है कि यह मंदिर आम लोगों के बीच रावण का मंदिर नाम से प्रसिद्ध है।

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मंदिर का निर्माण आज से करीब 100 साल पहले पंडित बलदेव प्रसाद शर्मा ने कराया था। बाद में उनकी देखरेख में यह मंदिर स्थानीय आस्था का केंद्र बना। उनके निधन के बाद उनके दामाद रवींद्र कुमार शर्मा ने इसकी जिम्मेदारी संभाली। अब यह दायित्व उनके नाती पंडित सुमित शर्मा के पास है। वे प्रतिदिन पूजा-पाठ करते हैं और दशहरा पर विशेष अनुष्ठान का आयोजन करते हैं। 

अनोखी परंपरा का प्रतीक
जहां एक ओर रावण को अहंकार, अधर्म और बुराई का प्रतीक मानकर जलाया जाता है, वहीं बदायूं का यह मंदिर एक अलग संदेश देता है। यह परंपरा बताती है कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन केवल उसके दोषों से नहीं बल्कि गुणों से भी किया जाना चाहिए। यही वजह है कि दशहरा के दिन यह मंदिर अद्वितीय आस्था का केंद्र बन जाता है।

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दशहरा पर उमड़ती है भीड़ 
पूरे साल मंदिर में भक्त अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने लोग आते हैं। दशहरा पर यहां रावण की पूजा देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा-विधि के दौरान रावण को एक आदर्श शिवभक्त और विद्वान के रूप में स्मरण किया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि दशहरा पर यहां रावण की पूजा करने से विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है। कई लोग इसे शिवकृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर मानते हैं।
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शिवभक्त रावण की है विशेष प्रतिमा
इस मंदिर में रावण की प्रतिमा शिवलिंग के पास स्थापित है। मंदिर में शिव दरबार, भगवान विष्णु, हनुमान जी, माता काली, माता दुर्गा और शिवलिंग स्थापित हैं। दशहरा के दिन श्रद्धालुओं की विशेष श्रद्धा रावण की प्रतिमा के प्रति रहती है। पंडित सुमित शर्मा बताते हैं कि रावण को केवल नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। वह महाज्ञानी, प्रकांड विद्वान और शिव का परम भक्त था। इसलिए यहां दशहरा के दिन उसके सद्गुणों की पूजा होती है, अवगुणों की नहीं।

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