दशहरा पर उमड़ती है भीड़
पूरे साल मंदिर में भक्त अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करने लोग आते हैं। दशहरा पर यहां रावण की पूजा देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पूजा-विधि के दौरान रावण को एक आदर्श शिवभक्त और विद्वान के रूप में स्मरण किया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि दशहरा पर यहां रावण की पूजा करने से विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है। कई लोग इसे शिवकृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर मानते हैं।
शिवभक्त रावण की है विशेष प्रतिमा
इस मंदिर में रावण की प्रतिमा शिवलिंग के पास स्थापित है। मंदिर में शिव दरबार, भगवान विष्णु, हनुमान जी, माता काली, माता दुर्गा और शिवलिंग स्थापित हैं। दशहरा के दिन श्रद्धालुओं की विशेष श्रद्धा रावण की प्रतिमा के प्रति रहती है। पंडित सुमित शर्मा बताते हैं कि रावण को केवल नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। वह महाज्ञानी, प्रकांड विद्वान और शिव का परम भक्त था। इसलिए यहां दशहरा के दिन उसके सद्गुणों की पूजा होती है, अवगुणों की नहीं।