बरेली/बदायूं। जिले के असधरमई क्षेत्र में बाबा निहाल दास मिल से जुड़े राशन के चावल घोटाले को दबाने में अभी तक अफसरों की ही भूमिका सामने आ रही थी, अब नेता और पुलिस भी मिल संचालक के मददगार बने हुए हैं। एक महीने से दिखावे के लिए उसावां थाना प्रभारी को तहरीर दी जा चुकी है जिस पर अभी तक रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हो सकी है।
पांच महीने से सरकारी राशन का मोटा चावल जमा न करके शासन की आंख में धूल झोंक रहे असधरमई चावल मिल मालिक शिवओम मिश्रा की स्थानीय पुलिस प्रशासन व विभागों में मजबूत पकड़ है। शायद तभी चावल के साथ ही सरकारी धन गबन करने के बाद भी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरसी के बहाने उसे लगातार समय देकर अधिकारी भी अप्रत्यक्ष रूप से शासन को चूना लगाने में सहयोग देते नजर आ रहे हैं। एफआईआर कराने की कोशिश कितने मन से की गई, ये भी जिम्मेदारों के बयानों से साफ हो रहा है।
दरअसल चतुर्थ श्रेणी स्टोर कीपर का पद होने के बाद भी जिला प्रबंधक के पद पर कार्यभार देख रहे ओमप्रकाश मौर्य ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान सफाई दी कि वह एक महीने पहले ही उसावां थाने के प्रभारी वीरपाल सिंह को तहरीर देकर शिवओम मिश्रा व अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट नहीं लिखी गई तो एक महीने में दो बार फिर थाने गए लेकिन इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट नहीं लिखी। वह इसमें क्या कर सकते हैं।
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इंस्पेक्टर उसावां बोले- तहरीर देकर रिपोर्ट से मना कर दिया
हालांकि इंस्पेक्टर वीरपाल सिंह के सुर इस मामले में कुछ अलग हैं। वह स्वीकारते हैं कि एक महीने पहले तहरीर उन्हें मिली थी। बताते हैं कि करीब चार पांच दिन बाद ही जिला प्रबंधक व अन्य जिम्मेदारों ने उनसे आग्रह किया कि रिपोर्ट दर्ज न की जाए, वह लोग मामला सुलझा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने रिपोर्ट नहीं लिखी। इधर, सूत्र बताते हैं कि मिल मालिक ने एक सत्ता पक्ष के नेता को साध लिया है। साथ ही थाने से लेकर संबंधित विभागों में सेटिंग कर ली है कि उसके खिलाफ कार्रवाई न हो।
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जिला प्रबंधक बोले- गलती अफसरों की, मुझसे रुपये मांग रहे पत्रकार
- जिला प्रबंधक की जिम्मेदारी निभा रहे ओमप्रकाश मौर्य ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान चौंकाने वाले आरोप लगाए जिसकी रिकार्डिंग सुरक्षित कर ली गई। उन्होंने कहा कि चावल मिल तक न पहुंचने में विपणन से लेकर सहकारिता विभाग तक के अधिकारियों की गलती है लेकिन गला उनका पकड़ा जा रहा है। संयुक्त निदेशक सहकारिता उनसे एफआईआर की कॉपी मांग रहे हैं और न देने पर निलंबन की धमकी दे रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ पत्रकारों ने जीना दूभर कर दिया है, वह मुझसे लगातार रुपयों की मांग कर रहे हैं। ऐसे में वह काफी परेशान हैं।