बदायूं क्लब तथा रंग आयोजन समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में कवि बलवीर सिंह रंग को याद किया गया। उनकी स्मृतियों को विभिन्न माध्यमों से रेखांकित किया गया। वरिष्ठ गजलकार मुन्ने सिंह आंचल की ओर से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला सम्मान रंग सम्मान वरिष्ठ गजलकार, गीतकार उझानी निवासी टिल्लन वर्मा को प्रदान किया गया।
कवियत्री डॉ. सोनरुपा विशाल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। टिल्लन वर्मा ने सुनाया-
जो रचनाकार इंसा को बनाता है मिटाता है, उसे इंसान अक्सर जिंदगी में भूल जाता है।
महापुरुषों तुम्हारा स्मरण चिरकाल तक होगा, जयंती कब किसी धनवान की कोई मनाता है।
डॉ. शैलेंद्र कबीर ने पढ़ा-
ये हौसला नहीं है कि खींचे बड़ी लकीर, खीचीं हुई लकीर मिटाने में लगे हैं।
डॉ. अक्षत अशेष ने कहा-
यूं मिलने को सभी लोग मिल चुके मुझसे, तेरा जब तक ना हो दीदार गजल कैसे कहूं।
अशोक खुराना ने कहा-
कुछ ऐसे फूट के रोई सियासत, करोड़ों नोट आंसू बन के निकले।
कवि सुरेंद्र नाज ने पढ़ा-
हमें जैसा भी चाहो रुप दे दो, अभी हम चाक पर रक्खे हुए हैं।
डॉ. अवधेश पाठक ने कहा-
क्या जरुरत है हमें उपलबढ्धियों की अन्यथा, चाहे जैसा वक्त हो, मौसम पर छा जाते तो हैं।
इसके अलावा डॉ. सोनरूपा, अहमद अमजदी, अंजुम बदायूंनी, माजिद बदायूंनी, डॉ. विजय निर्बाध आदि ने भी काव्य पाठ पढ़ा। कार्यक्रम में डीएस राठौर, रविंद्र मोहन सक्सेना, नरेश चंद्र शंखधार, सुधा पाठक, राहुल चौबे, सुमित मिश्रा, ओमप्रकाश शर्मा, आत्मप्रकाश सक्सेना, शिवम भारद्वाज आदि मौजूद रहे।