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कारागार में गूंजी कान्हा की किलकारियां

Fri, 12 Feb 2016 11:57 PM IST
बदायूं
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अब्दुल्लागंज के बड़े हनुमान मंदिर में रासलीला के पहले दिन पद्मश्री हरगोविंद दास महाराज की मंडली के कलाकारों ने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का मंचन किया। कंस, देवकी और वासुदेव के बीच संवादों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कारागार में जन्म लेते ही जब कान्हा की किलकारियां गूंजीं तो सारे बंदी रक्षक अचेत हो गए।
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रासलीला का मंचन शाम सात बजे शुरू हुआ। मुख्य अतिथि, उद्योगपति विष्णुभगवान अग्रवाल और अभिषेक अग्रवाल ने मंच पर राधा-कृष्ण की झांकी का पूजन किया। रासलीला के दौरान कंस का अभिनय कर रहे कलाकार रामकिशोर और देवकी के रूप में कमलेश के बीच हुए संवादों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। आकाशवाणी सुन कंस ने जब देवकी की हत्या को तलवार उठाई तभी वासुदेव ने वाक्पटुता से कंस को प्रभावित कर देवकी की जान बचा ली। इसके बाद कंस ने वासुदेव और देवकी को कारागार में डालकर पहरा बैठा दिया।
श्रीकृष्ण जन्म की लीला के दौरान वासुदेव और देवकी के बीच संवाद भी दर्शकों को खूब भाए। जन्म के बाद श्रीकृष्ण को गोकुल पहुंचाने की लीला का मंचन हुआ तो पांडाल में जय कन्हैया लाल के जयकारे गूंजने लगे। व्यवस्थाओं में आयोजक मंडल के सदस्य ओमप्रकाश शर्मा, महंत कमलाकांत शर्मा, कन्हैया शर्मा, बबलू, रवेंद्र सक्सेना, आनंद मिश्र, अनुशेखर मिश्र, पंकज सक्सेना, ममता देवी, आरती शर्मा, राजीव लोचन, गुनगुन, प्रांजल आदि का सहयोग रहा।
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श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने की जरूरत
उझानी। अब्दुल्लागंज में श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रीधाम पुष्कर के पीठाधीश्वर रामचंद्राचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने मर्यादित आचरण से मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाने का हक पाया था। श्रीराम सर्वव्यापी थे लेकिन उन्होंने इंसान की तरह जीवन जीकर एक आदर्श प्रस्तुत किया। वह चाहते तो राक्षसों का पल भर में संहार कर सकते थे लेकिन ऐसा नहीं किया। श्रीराम का जीवन हमें नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने पर जोर देता है। इंसान क्या नहीं कर सकता। श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतार कर अच्छा आचरण करें तो समाज में सम्मान मिलेगा।
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