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...तब तक पाक का झमेला नहीं जाएगा

Wed, 28 Oct 2015 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बदायूं
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कवि सम्मेलन की शुरूआत सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जलन के साथ हुआ। हाथरस की कवियत्री रूबिया खांन ने फरमाया, ‘मेरे वतन को इस तरह बदनाम न करो, घोटाले की छुरियों से इस तरह कत्लेआम न करो।’
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 गाजियाबाद से आए हास्य कवि इंद्र प्रसाद अकेला ने पढ़ा, ‘रंग यूं भी बदलते देखे हैं, हमने पत्थर पिघलते देखे हैं, एक दूजे के लहू के प्यासे, हमने पगड़ी बदलते देखे हैं।’
कवि उमाशंकर राही ने पड़ोसी मुल्क की हरकतों पर जमकर कटाक्ष किया। बोले, ‘सीमाओं पर जंग वाला रंग दिखने लगा है, लगता है युद्घ और ढकेला नहीं जाएगा, जब तक आर पार वाली न होगी लड़ाई, तब तक पाक का झमेला नहीं जाएगा।’ जनवादी कवि टिल्लन वर्मा ने कहा, ‘ रौब शरीफों पर गालिब करती खाकी वर्दी है, और इसी वर्दी के कारण कायम गुंडागर्दी है।
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रस्सी को सांप बनाती ये निर्मोही पलभर में, अच्छे-अच्छों की वर्दी ने ऐसी-तैसी कर दी है।’
कवियत्री डॉ. नेहा इलाहाबादी ने फरमाया, ‘ये उम्रे रवां किसकी फानी रहेगी, हमारी-तुम्हारी कहानी रहेगी, तुम्हें याद करते रहेंगे हमेशा, जुबां पर यही निशानी रहेगी।’
 देर रात तक चले कवि सम्मेलन में मेजबान कवि अवधेश सक्सेना, शोभित सक्सेना, संजीव अमर, डॉ. गीतम सिंह, रामअवतार गुप्ता, राजेंद्र गुप्ता, डॉ. प्रभाकर और विजय वार्ष्णेय ने भी काव्य पाठ पेश किया। संस्कार भारती के पदाधिकारियों ने कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस मौके पर रामलीला अध्यक्ष कृष्णकुमार वार्ष्णेय, विशन कुमार मित्तल, संजय मूदड़ा, संजीव गुप्ता, प्रजीत वार्ष्णेय, प्रवीण मित्तल, रोहताश गुप्ता, रमेश बंसल, संतोष कुमार गुप्ता, अभिषेक वार्ष्णेय, त्रिलोकीनाथ बांगड़ा आदि मौजूद थे।
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