दातागंज। तहसील क्षेत्र में रामगंगा नदी ने कई गांवों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। सिमरिया, सकतपुर, मौसमपुर और जरतौली गांवों के ग्रामीण ज्यादा दिक्कतें झेल रहे हैं। ये गांव चारों ओर से रामगंगा से घिर गए हैं। सकतपुर गांव के घरों में पानी पहुंचने से ग्रामीण ज्यादा परेशान हैं। घरों से बाहर शौच जाने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, सिमरिया गांव को कटान से बचाने के लिए ग्रामीण गांव किनारे के कई पेड़ों को काटकर उससे रामगंगा का बेग बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
सकतपुर गांव में 1200 की आबादी है। ढाई सौ कच्चे-पक्के व झोंपड़ीनुमा मकान हैं। आधे गांव के घरों में पानी भरा है। गांव के शिव सिंह, चरन सिंह आदि ग्रामीणों के घरों में पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ का पानी आने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। बच्चों का खेलना बंद हो तो बुजुर्गों का गांव में घूमना फिरना बंद हो गया। झोंपड़ियों के अंदर तक पानी पहुंच गया है।
वहीं, सिमरिया गांव में रामगंगा की लहरें टकरा रही हैं। ग्रामीण रातभर जागकर पहरेदारी कर रहे हैं। इस गांव की एक हजार आबादी है। पिछले साल भी बाढ़ आई थी। गांव बचाने के लिए बांध बना लेकिन इस गांव पर खतरा बरकरार है। सिमरिया को बचाने के लिए बाढ़ खंड ने कट्टे लगाए लेकिन वे बह चुके हैं। ग्रामीण सूरजपाल, वेदपाल ने बताया कि गांव को बचाने के लिए ग्रामीण रात जागकर काट रहे हैं। कटकौरा गांव के किनारे तक रामगंगा का पानी पहुंच गया है। देवरनिया और देवचरी गांव के चारों ओर पानी पहुंच गया है। देवचरी में अरिल नदी का पानी पहुंचा है। इधर, एसडीएम दातागंज विनोद कुमार ने बताया कि दातागंज क्षेत्र में जिन गांवों के किनारे गंगा और रामगंगा का पानी पहुंचा हुआ है, वहां निगरानी कराई जा रही है। आवागमन के लिए वोट और नाव भी लगाई गई हैं।
हजरतपुर-गड़िया रंगीन और नगरिया खनू-गड़िया रंगीन मार्ग पर और दिक्कतें और बढ़ीं
- हजरतपुर-गड़िया रंगीन और नगरिया खनू-गड़िया रंगीन मार्ग पर दुश्वारियां और बढ़ गई हैंं। दोनों मार्गों पर तीन से चार फिट तक पानी चल रहा है। दोपहिया, चारपहिया वाहनों की आवाजाही पूर्णता बंद है। मार्गों पर नाव से ही आवागमन हो रहा है।
पुलिया के एंगलों से नाव के टकराने की आशंका
- हर्रेनगला और गड़िया शाहपुर के बीच में पुलिया पर पानी चढ़ गया है। इससे पुलिया डूब गई। पुलिया के दोनों तरफ के एंगल भी डूबे हुए हैं। ऐसे में नाव चलने के दौरान उसके साथ हादसा होने का खतरा बन गया है। नाव एंगल से टकराई तो जानमाल का भी नुकसान हो सकता है।
सकतपुर गांव की झोपड़ियों में पहुंचा रामगंगा का पानी। संवाद