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Budaun News: ‘राम नहीं दिखते भैया में, सीता दिखे न भाभी में’

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कवियों का सम्मान करते आयोजक। स्रोत- आयोजक
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उसावां। मन्दाकिनी साहित्य मंच के तत्वावधान में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इसका शुभारंभ कवि शेर सिंह शेर एवं प्रियंका अनिल सिंह चौहान ने किया। सभी कवियों व समाजसेवियों को पटका पहनाकर व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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होली चौक पर विराट कवि सम्मेलन में गीतकार डॉ. अरविंद धवल ने पढ़ा- राम नहीं दिखते भैया में, सीता दिखे न भाभी में। ताला तोड़ रहे हैं हम, विश्वास नहीं है चाबी में। हम कस्तूरी ढूंढ रहे हैं अब कुत्तों की नाभि में। उसहैत से छन्दकार नन्दकिशोर पाठक ने पढ़ा- इस देश में ही पुनर्जन्म मांगते रसखान, इकबाल का सारे जहां से प्यारा हिंदुस्तान। अब्दुल हमीद जैसे वीर जान दे गए, अशफ़ाक़ उल्ला खान के सपने नये-नये।
वयोवृद्ध ओज कवि महेश चन्द मिश्र अग्नि मुख ने पढ़ा- है बहुत ही अंधेरा मेरे देश में, कर सकूं मैं उजाला सारे वतन में। कवि जगपाल जग ने पढ़ा- मैंने मुश्किलें हालात में खुद को संवारा है, मैं कैसे भुलाऊं आपने किस्तों में मारा है। कस्बे के शायर अब्दुल वहाब ने पढ़ा- चुनौती आंधियों को दे रहा है, मेरे आंगन में जो बूढ़ा शजर।
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बरेली से आये ओज के कवि कमल कान्त तिवारी ने पढ़ा- कह दो भारत की संसद से और सियासत दारों से, जंग नहीं जीती जाती है, जंग लगे हथियारों से। इस मौके पर धर्मेंद्र सिंह चौहान, डीके गुप्ता, हरेन्द्र सिंह, सन्तोष कुमार गुप्ता , अनुज कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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