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राम ने भक्त का ही नहीं, शत्रु का भी कल्याण किया

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बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव रिसौली में मेरे रामकथा समिति के तत्वावधान में पिछले तीन दिनों से चल रही रामकथा में बुधवार को रवि समदर्शी महाराज ने भगवान राम की महिमा का बखान करते हुए कहा कि भगवान राम के तीर चलाने पर भी तीर की चोट दिखाई नहीं देती है। उनकी चोट को भी दया का रूप बताया गया है। राम ने अपने भक्त का ही नहीं अपितु शत्रु का भी कल्याण किया है।
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राम के द्वारा मारीच के पीछे-पीछे चलने की कथा का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि रावण के आग्रह पर मारीच ने स्वर्ण मृग का रूप धारण किया। मारीच ने विचार किया कि रावण का कहना मानने से भी मेरी मृत्यु होना निश्चित है और न मानने से भी मृत्यु निश्चित है। इसमें श्रीराम के हाथों से मृत्यु ही कल्याणकारी है। महाराज ने कहा कि शरीर किसी के साथ रहने वाला नहीं और परमात्मा साथ छोड़ने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि मानव अपना बगीचा लगाता है तो बड़े जतन से उसकी देखभाल करता है। फिर जिस परमात्मा ने इतना बड़ा संसार रूपी बगीचा लगाया है वह उसकी देखभाल कैसे छोड़ सकता है। वही संसार का सच्चा रखवाला है। इस मौके पर सोनू शर्मा, विपिन कुमार, योगेश कुमार, दुष्यंत कुमार, भानुप्रताप सिंह, अवधेश, धर्मेंद्र सिंह, दिनेशपाल, बुध्दपाल, पंकज मिश्रा, संजीव सिंह, अमन कुमार आदि मौजूद रहे।
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