गांव-देहात से लेकर शहरी कल्चर में इस त्योहार को लोगों ने बड़े उत्साह
और उमंग के साथ मनाया। सुबह से ही इसके लिए तैयारियां शुरू हो गईं थीं।
बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधी और मिठाइयां खिलाईं। भाइयों ने
बहनों को उपहार और दक्षिणा दी। भाइयों ने इस अवसर पर बहनों की संरक्षा और
सुरक्षा का वचन लिया।
जेल में बंदी भाइयों को राखी बांधने की होड़ लगी
जिला
जेल में भी बहन-भाइयों का प्यार परवान चढ़ा। बहनें मिठाई और राखियां लेकर
जेल गेट पर डट गईं। जेल प्रशासन ने भी इसके लिए विशेष बंदोबस्त किए ताकि
कोई बहन अपने भाई को राखी बांधने से वंचित न रह पाए। शाम तक जेल पर बहनों
को जमघट लगा रहा।
विदेशों से या सुदूर इलाकों से नेट पर मना रक्षाबंधन
जो
बहन-भाई विदेश में हैं या काफी दूर हैं। किसी कारणवश मिल नहीं सकते। नेट
यूजर बनकर एक दूसरे से मिले और बधाई देने के साथ राखियों और मिठाइयों के
फोटो सिंबल के रूप में भेजकर रक्षाबंधन पर्व मनाते रहे। भावनाओं से
उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से रक्षा बंधन मनाया।
भाई-बहन मिलने निकले तो मुश्किलों भरा रहा सफर
जिले
में सभी सड़कें और छोटे-बड़े मार्गों पर वाहन दौड़ते नजर आए। डग्गामार
वाहन भी खूब चले। बावजूद इसके हर ओर यात्रियों की भरमार रही। प्राइवेट
बसों, रोडवेज बसों के अलावा ट्रेनों में भारी भीड़ रही। इस्लामनगर होकर
दिल्ली जाने वाली बस सुबह देर से चलने के कारण महिलाओं और बच्चों को भारी
परेशानी का सामना करना पड़ा। बसों में भूसे की तरह यात्रियों को भरा गया।
लालपुल पर लगा भुजरियों का पारंपरिक मेला
जिलेभर
में रक्षाबंधन के साथ भुजरियां कानपर रखकर दीर्घायु की कामना करने का
सिलसिला भी देर शाम तक चला। परंपरा के अनुसार उपलों पर उगाए गेहूं की पौध
को परिवार के लोगों के कानों पर लगाई जाती हैं और उनकी दीर्घायु की कामना
की जाती हैं। शहर में लालपुल पर शाम को भुजरियां सिराहने वाली महिलाएं और
बच्चे पहुंचे। यहां सोत नदी पर भुजरियों के उपले सिराह दिए जाते हैं और
पौधे घर लाकर परंपरा निभाई जाती है। लालपुल पर यहां मेला भी लगा।
सुरैनी पापड़ी में गीत गाती पहुंची महिलाएं भुजरियां सिराहने
दबतोरी।
सुरैनी-पापड़ी गांव में महिलाएं गीत गाती हुई परंपरा के अनुसार भुजरियां
सिराहने समीपवर्ती तालाब पर पहुंची। रबी की फसल की शुरूआत होने वाली होती
है। इससे पूर्व खुशी के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। रक्षाबंधन पर यह
खुशी प्रकट की जाती है। बाद में भुजरियों को कानों पर रखकर दीर्घायु की
कामना की गई।