चार महीने पहले अगवा बेटी का अभी तक पता नहीं चला। पुलिस के चक्कर पर चक्कर काटे पर कार्रवाई ढीली रही। सिस्टम से हारे पिता ने दो बार आत्मदाह की कोशिश की। एक बार उसे आश्वासन मिला। जबकि उसका है एक सत्ताधारी नेता के दबाव में पुलिस आरोपियों को बचा रही है।
मूसाझाग थाने के गांव किसरुआ निवासी राजवीर के अनुसार 13 अगस्त को उसकी बेटी को अगवा किया गया। किसी तरह 15 अगस्त को गांव के ही अशोक, धीरा और धीरसिंह यादव के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन बेटी अभी तक न मिली। आरोपियों में अशोक ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। धीरा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि धीरेंद्र अब भी फरार है। बेटी को बरामद करने और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर राजवीर ने पिछले महीने विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश की तो लखनऊ से लेकर बदायूं तक हड़कंप मच गया। पुलिस ने उस वक्त आश्वस्त कर उसे वापस कर दिया। लेकिन पुलिस का रवैया बदलता न देख उसने दोबारा आत्मघाती उठा लिया। उसका कहना है कि धीरेंद्र एक सत्ताधारी नेता का रिश्तेदार है। इसी वजह से पुलिस पूरे मामले में लापरवाही बरत रही है।
लड़की को बरामद करने की कोशिश की जा रही है। फरार आरोपी के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई चालू कर दी गई है। किसी तरह के दबाव की बात गलत है। लड़की को जल्द बरामद कर लिया जाएगा।-एपी सिंह यादव, एसओ मूसाझाग