चार महीने पहले अगवा बेटी की बरामदगी न होने से थाना मूसाझाग के किसरुआ गांव के राजवीर यादव को सिस्टम से अब कोई उम्मीद नहीं बची है। बेटी की बरामदगी के लिए वह लखनऊ जाकर दो बार विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश कर चुके हैं। लेकिन उन्हें कोई नतीजा निकलता नहीं नजर आ रहा है। लिहाजा उन्होंने गांव छोड़ने का मन बनाया है। शुक्रवार को यह बात उन्होंने लखनऊ से अपने भाई हरिओम से फोन पर कही।
थाना मूसाझाग के गांव किसरुआ के राजवीर यादव की बेटी को गांव के ही अशोक, धीरा यादव और धीरेंद्र यादव ने 13 अगस्त को अगवा कर लिया था। राजवीर की तहरीर पर पुलिस ने 15 अगस्त को तीनों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया। अशोक ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। धीरा को राजवीर के परिवार वालों ने पकड़ कर पुलिस के सुपुर्द किया था। धीरेंद्र यादव अब भी फरार है। लड़की भी बरामद नहीं हो सकी है। राजवीर का आरोप है कि धीरा और धीरेंद्र सत्तापक्ष के एक नेता के रिश्तेदार हैं। इस वजह से पुलिस उसकी बेटी को बरामद नहीं कर रही। धीरेंद्र को भी गिरफ्तार नहीं किया जा रहा। इससे उसे और उसके परिवार को जानमाल का खतरा है।
जिला स्तर पर कार्रवाई नहीं होने पर राजवीर ने परिवार के साथ पिछले महीने भी विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश की थी। उसने एक महीने का वक्त दिया था। पर भी कार्रवाई नहीं हुई तो उसने गुरुवार को फिर से परिवार के साथ लखनऊ पहुंच कर विधानसभा के सामने आत्मदाह की कोशिश की। गांव में राजवीर का घर बंद पड़ा है। उसके भाई राजपाल और हरीओम उसकी वापसी का इंतजार कर रहे हैं। शुक्रवार को भी राजवीर घर नहीं पहुंचा। हरिओम का कहना है कि उसकी राजवीर से फोन पर बात हुई। वह काफी निराश है और गांव छोड़ने की बात कह रहे हैं। राजवीर की दो बेटियां, दो बेटी और पत्नी कांता देवी भी उसके साथ है।
मामले में विधिक कार्रवाई की जा रही है। दो आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। फरार चल रहे एक आरोपी के खिलाफ कोर्ट से कुर्की के वारंट हासिल कर लिए गए हैं। लड़की की बरामदगी के लिए दो पुलिस टीमों को लगाया गया है। किसी तरह के दबाव की बात गलत है।
-अनिल कुमार यादव, एसपी सिटी