गोष्ठी में प्राचार्य डॉ. एचपी खरे ने कहा कि भारतीय संस्कृति की विशेषता उदारता रही है, जिसमें सभी आध्यात्मिक एवं वैचारिक अधिष्ठापनों को समान सम्मान एवं गरिमा दी जाती है। वर्तमान भारत विश्व के कुछ गिने-चुने देशों की सूची में शामिल है, जहां कोई भी नागरिक अपनी धार्मिक स्वतंत्रता को अक्ष्क्षुण बनाए रख सकता है। डॉ. इकबाल हबीब ने कहा कि संवैधानिक अधिकार सुदृढ़ होते जा रहे हैं, जबकि धर्मपिरपेक्षता पर खतरा बढ़ता जा रहा है।
प्रतियोगिता में निर्णायक डॉ. सुनील श्रीवास्तव एवं प्रीति वाजपेयी ने बीए प्रथम वर्ष की स्वीटी, को प्रथम, बीए द्वितीय वर्ष के सत्यदेव आर्य को द्वितीय और बीए तृतीय वर्ष की प्रिया यादव को तीसरा स्थान दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान डॉ. राकेश जायसवाल, डॉ. आरएन सिंह, डॉ. शिवपाल सिंह यादव, डॉ. दिनेश तोमर, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. सारिका शर्मा, डॉ. पारुल रस्तोगी, विश्राम सिंह आदि मौजूद रहे।