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Budaun News: राजा भर्तृहरि के नाटक का किया मंचन

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रामलीला में भारत मां की झांकी। संवाद
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बदायूं। गांधी ग्राउंड में चल रहे रामलीला महोत्सव के चौथे दिन कलाकारों ने राजा भर्तृहरि के नाटक का मंचन किया। इससे पहले कलाकारों ने भारत माता की झांकी प्रस्तुत की। साथ ही देश भक्ति के गीत गाए।
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नाटक मंचन में दिखाया गया कि एक बार राजा भर्तृहरि अपनी पत्नी पिंगला के साथ जंगल में शिकार खेलने गए थे। वहां काफी समय तक भटकते रहने के बाद भी उन्हें कोई शिकार नहीं मिला। निराश पति-पत्नी जब घर लौट रहे थे तो रास्ते में उन्हें हिरनों का एक झुंड दिखाई दिया। उसके आगे एक मृग चल रहा था। भर्तृहरि ने उस पर प्रहार करना चाहा तभी पिंगला ने उन्हें रोकते हुए अनुरोध किया। कहा कि महाराज यह मृगराज सात सौ हिरनियों का पति और पालनकर्ता है। इसलिए आप उसका शिकार न करें।
भर्तृहरि ने पत्नी की बात नहीं मानी और हिरन को मार डाला। प्राण छोड़ते-छोड़ते हिरन ने राजा भर्तृहरि से कहा कि तुमने यह ठीक नहीं किया। अब जो मैं कहता हूं उसका पालन करो। मेरी मृत्यु के बाद मेरे सींग श्रृंगीबाबा को, मेरे नेत्र चंचल नारी को, मेरी त्वचा साधु-संतों को, मेरे पैर भागने वाले चोरों को और मेरे शरीर की मिट्टी पापी राजा को दे दो। हिरन की करुणामयी बातें सुनकर भर्तृहरि का हृदय द्रवित हो उठा। हिरन काे घोड़े पर लाद कर वह मार्ग में चलने लगे। रास्ते में उनकी मुलाकात बाबा गोरखनाथ से हुई।
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भर्तृहरि ने इस घटना से अवगत कराते हुए उनसे हिरन को जीवित करने की प्रार्थना की। इस पर बाबा गोरखनाथ ने कहा कि मैं एक शर्त पर इसे जीवनदान दे सकता हूं कि इसके जीवित हो जाने पर तुम्हें मेरा शिष्य बनना पड़ेगा। राजा ने गोरखनाथ की बात मान ली। इसके साथ ही नाटक का समापन हो गया।
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