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गंगा का जलस्तर बढ़ा, आश्रमों तक पहुंची धार

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पर्वतीय क्षेत्र में हुई झमाझम बरसात का असर से गंगा किनारे के लोग भी शनिवार रात रूबरू हो गए। हरिद्वार से पानी छूटते ही गंगा का जलस्तर भी बढ़ गया। बाढ़ के खतरे से आशंकित ग्रामीणों ने बचाव को अभी से बंदोबस्त शुरू कर दिए हैं, लेकिन कछला घाट पर गंगा की धार आश्रमों तक पहुंच गई। पूरे दिन आश्रमों की दीवारों से सट कर पानी बहता नजर आया।
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नरौरा के रास्ते गंगा में जलस्तर बढ़ने का सिलसिला शनिवार शाम को शुरू हो गया। रात में करीब आठ से 10 बजे के बीच कछला गंगाघाट की पूरी तलहटी जलमग्न हो गई। दोपहर से घाटों पर मौजूद दुकानदारों ने सामान समेटना शुरू कर दिया, लेकिन देर शाम  अचानक ही जलस्तर में वृद्धि की वजह से कुछेक को तो झोपड़ियां हटाना भी मुश्किल हो गया। तीन दुकानदारों के छप्पर भी बह गए। घाट पर गंगा की धार आश्रमों तक पहुंच गई है।
जलस्तर वृद्धि की वजह से गंगा किनारे बसे गांव हुसैनुपर खेड़ा, ढकनगला, सरौता और पिपरौल आदि के ग्रामीण भी बाढ़ के खतरे से आशंकित हैं। ग्रामीणों में हरपाल ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्र की बारिश ने नुकसान का खतरा बढ़ा दिया है। बता दें कि हरिद्वार से दो दिन पहले ही 1.93 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
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सरौता के ग्रामीणों की फसलें प्रभावित
उझानी। गंगा जलस्तर वृद्धि से बहाव सरौता की ओर तेजी से हो रहा है। सरौता निवासी ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि भी गंगा की तलहटी से जुड़ी है। अगेती मक्का की फसल जलस्तर की चपेट में आ गई हैं। ग्रामीणों की मानें तो जलस्तर में वृद्धि बरकरार रही तो पानी बाढ़ का रूप ले लेगा।
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