बदायूं/उझानी। धान और बाजरा की कटाई के वक्त मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बृहस्पतिवार सुबह कहीं बूंदाबांदी तो कुछ इलाकों में हुई बारिश हुई। आगे भी बारिश हुई तो फसलों को काफी नुकसान होगा।
अक्तूबर का महीना खेत-खलिहान के लिए काफी अहम रहता है। इसी महीने में धान, बाजरा और पिछेती मक्का की पैदावार से किसानों के घर-आंगन भनने लगते हैं। ऐसे में बारिश किसी भी स्तर पर फसलों को फायदा नहीं पहुंचा सकती। सितंबर में बारिश हुई तो सर्वाधिक नुकसान धान और बाजरा के साथ शिमला मिर्च को हुआ था।
धान और बाजरा तो खेतों में गिर गया था। हाल ही में मौसम ठीक हुआ तो किसानों को लगा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन बृहस्पतिवार को पहले बूंदाबांदी, फिर बारिश ने सबसे ज्यादा धान और बाजरा का नुकसान पहुंचाया है। गनीमत रही कि बारिश के दौरान फिलहाल तेज हवा नहीं चल रही है। तेज हवा चलने पर दोनों फसलों को काफी नुकसान होगा। उड़द के अलावा सब्जी फसलों में टमाटर, लौकी और तोरई भी आफत की चपेट में आती जा रही है।
किसानों की जुबानी... बर्बादी की कहानी
पिछले महीने धान की फसल को काफी नुकसान होने के बाद उम्मीदों पर पानी फिर जाने से आहत मलिकपुर निवासी नेत्रपाल ने बताया कि उन्होंने चार बीघा खेत में धान की रोपाई की थी। बारिश नहीं हुई तो निजी संसाधनों से सिंचाई के नाम पर खर्चा भी अधिक करना पड़ा। अब, फसल ही ठीक नहीं बची है तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। रोहान गांव के हरीओम का कहना है कि शिमला मिर्च की खेती पर काफी खर्चा आता है। पौध लगाने के बाद भी पौधे बढ़वार नहीं पकड़ पा रहे हैं। बुटला के धनसिंह ने बताया कि बाजरा की फसल की बर्बादी का प्रभाव पशुओं के चारे पर पड़ेगा। चारा के लिए किसानों को भटकना होगा। मौसम की मार से फसलों को बचाया नहीं जा सकता।
किसानों के लिए सुझाव
- धान की फसल में बारिश का पानी भर जाए तो उसकी निकासी के लिए अस्थायी नालियां बनाकर निकालें।
- बारिश के दौरान बाजरे की फसल गिरे तो अनाज की बाली बचाने के लिए टहनियों का इस्तेमाल करें।
- शिमला और हरी मिर्च की फसल के खेतों में भी बारिश का पानी के निकास पर ध्यान दें।
- सब्जी फसलों में तोरई और लौकी में मचान पद्धति का इस्तेमाल करें।
- बारिश के दौरान किसी भी फसल में कीटनाशक का इस्तेमाल न करें।
मौसम विभाग की ओर से अलर्ट दिया जा चुका है। बारिश तेज होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। बारिश के पानी से फसलों को सड़ने से बचाने के लिए सबसे प्रभावी तरीका यही है कि खेतों से बारिश के पानी का निकास का बंदोबस्त समय रहते कर लिया जाए। इससे नुकसान कम होगा। -डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक