बरसात से गेहूं की फसल में नुकसान के अनुरूप सर्वे नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए कटरी के किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। खेतों में जुटे भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने महिला-पुरुषों की मौजूदगी में राजस्व कर्मियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। कहा कि तीन साल से लगातार नुकसान का दंश झेलने के बावजूद अफसर गौर नहीं करते। अफसरों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया गया।
कटरी से जुड़े गंगा किनारे के गांव रमनगला में भाकियू के ब्लॉक अध्यक्ष सोमवीर सिंह की अगुवाई में जुटे महिला-पुरुषों ने खेतों में पहुंचकर पिछले दिनों बारिश से खराब हुई गेहूं की फसल को दिखाया। बोले, 70 फीसदी तक नुकसान के बीच सर्वे के नाम पर राजस्व कर्मी असलियत उजागर नहीं कर रहे हैं। वर्ष-2012 से तीन साल तक बाढ़ ने तबाही मचाई थी। उस वक्त भी इलाके के किसानों को मुआवजा नहीं मिला। इस बार उन्हें पहले सूखा फिर बरसात से नुकसान का दंश झेलना पड़ा है। चार साल से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट बरकरार है। किसान महिला-पुरुषों ने राजस्व विभाग के अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि अफसरों ने वास्तविक नुकसान का आकलन करने में कोताही की तो अगली बार तहसील कार्यालय में तालाबंदी कर दी जाएगी। बता दें कि पांच दिन पहले रमनगला में जुटे करीब एक दर्जन गांव के पीड़ितों ने पंचायत भी की थी।
प्रदर्शनकारियों में गुलशन देवी, सत्यवती, राजेश्वरी, रेशमा, गीता देवी, सुमन, जयपाल माथुर, बृजपाल, महेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, सरदार सिंह, चंद्रपाल, प्रकाश, लटूरी लाल, मनोहर सिंह, रामचंद्र और प्रेमपाल आदि मौजूद शामिल थे।