सांसद धर्मेंद्र यादव द्वारा गांव दुर्गपुर को गोद लिये जाने के
बाद मंगलवार को प्राथमिक विद्यालय पर प्रदर्शनी और स्वास्थ्य शिविर लगाया
गया। डीएम शंभूनाथ और मुख्य विकास अधिकारी देवेंद्र सिंह ने प्रदर्शनी का
निरीक्षण किया। इस दौरान मीटिंग से गायब रहने वाले नलकूप विभाग के अधिकारी
के गायब मिलने पर डीएम ने स्पष्टीकरण मांगा है।
डीएम ने बताया कि
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी बदन सिंह इस गांव केथे इसलिए इस गांव को
सांसद ने गोद लिया है। यहां के विकास के लिए तैयारी कर ली गई है। गांव में
स्टेडियम से लेकर पाठशाला, यज्ञशाला, पानी की टंकी समेत अन्य सुविधाएं
मुहैया कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि गांव को आदर्श बनाने के साथ हमें भी
अपने जीवन में आदर्श आचार-विचार का समावेश करना होगा। आगे आकर सफाई में
सहयोग करने के साथ लोगों के मन से गंदे विचारों को भी दूर निकाल फेंकना
होगा। तभी ये गांव पूर्ण तरीके से आदर्श होगा।
इस मौके पर बताया कि एक
अप्रैल से राशन वितरण प्रणाली को खाद सुरक्षा मिशन से जोड़ दिया जाएगा। अब
80 प्रतिशत लोगाें को दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल उपलब्ध
कराया जाएगा। अगर गरीब इस योजना से वंचित रह गए, तो उन्हें ऑनलाइन
रजिस्ट्रशन कराना होगा। मीटिंग में नलकूप विभाग अधिकारी के गायब मिलने पर
डीएम ने उनसे जवाब तलब किया है। उन्होंने ग्रामीणों से बात कर उनकी
समस्याएं भी सुनीं।
जमीन विवाद निपटाने में बुजुर्गों को साथ रखने के
आदेश उप जिलाधिकरी हरिशंकर यादव को दिए। प्रदर्शनी में प्राथमिक विद्यालय
के अध्यापक राकेश आर्य ने कई तरह के माडल प्रदर्शित किए। कार्यक्रम में
डीडीओ प्रदीप कुमार सोम, पीडी रामरक्षपाल सिंह, बीडीओ सुनील कुमार, दुर्वेश
कुमार यादव, जितेंद्र सिंह यादव, जय सिंह मौजूद रहे।
डीएम की खबर का इंसेट
डीएम ने जाना कुपोषित बच्चों का हाल
बदायूं।
तहसील सदर के ग्राम पड़ौआ के प्राथमिक विद्यालय में कुपोषण मुक्त
कार्यक्रम के तहत शिविर आयोजित किया गया। जिलाधिकारी शंभू नाथ ने अति
कुपोषित बच्चों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, खान-पान एवं नियमित दूध
उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मंगलवार को जिलाधिकारी, सीडीओ देवेंद्र सिंह
कुशवाहा के साथ ग्राम पड़ौआ पहुंचे। जहां उन्होंने कुपोषित बच्चों का हाल
जाना। उनका वजन कराए जाने के साथ ही किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं
को उपलब्ध सुविधाआें के संबंध में जानकारी हासिल की।
पांच में से केवल दो बच्चे रहे अति कुपोषित
गांव
पड़ौआ में पांच बच्चे अति कुपोषण की श्रेणी में थे। अब केवल दो बच्चे
विकास पुत्र दुर्वेश एवं अनुष्का पुत्री ओमपाल अभी भी अति कुपोषण की श्रेणी
में हैं। शिविर में दो आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के अलावा किशोरियां,
गर्भवती एवं धात्री महिलाएं मौजूद थीं। माह नवंबर में सर्वे के आधार पर
गांव के एक आंगनबाड़ी केंद्र में 15 एवं दूसरे में चार बच्चों को कुपोषण की
श्रेणी में चिह्नित किया गया।
गांव की किशोरियां स्वस्थ, बहुएं कमजोर
जिलाधिकारी
ने पड़ौआ गांव में अपने सामने बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री
महिलाओं का वजन कराया। पाया कि गांव की किशोरियां तो पूर्ण रूप से स्वस्थ
हैं, लेकिन गांव की बहुओं का वजन कम है। उन्हें पौष्टिक आहार की अधिक
आवश्यकता है। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी निर्मला शर्मा, ग्राम
प्रधान सुभाष चंद्र, शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।