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पीने को पानी न खाने को भोजन... क्वारंटीन है या सजा

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कादरचौक। कादरचौक के गांव भमुइया के 25 लोग अलग-अलग तारीखों में दूसरे राज्यों से गांव लौटे थे। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद इनको गांव के प्राथमिक स्कूल में बनाए गए क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। क्योंकि इनके घरों में इतनी जगह नहीं है कि यह परिजनों से अलग रह सकें। लेकिन क्वारंटीन सेंटर में और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां का हैंडपंप खराब है। शौचालय भी चोक हो गया है। सफाई कर्मचारी आता ही नहीं। यहां रह रहे 25 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी नहीं है। क्वारंटीन लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत की गई। अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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बाहर से आने वाले मजदूरों को रखने के लिए पहले हर क्षेत्र में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए थे। बाद में सभी को होम क्वारंटीन किया जाने लगा। होम क्वारंटीन होने वाले अधिकांश लोग घरों में न रुककर बाहर घूमते रहते थे। कादरचौक के गांव भमुईया में अलग-अलग तारीखों पर आने वाले लोगों को होम क्वारंटीन किया गया था। लेकिन उनके घरों में पर्याप्त जगह न होने तथा अन्य परिजनों को संभावित संक्रमण से बचाने के लिए इन्हें भमुइया प्राथमिक विद्यालय में क्वारंटीन किया गया। लेकिन क्वारंटीन लोगों के मुताबिक यहां की व्यवस्था काफी खराब है। इनका कहना है कि स्कूल का हैंडपंप खराब पड़ा है। सुबह शौच को इधर-उधर भागना पड़ता है। क्योंकि यहां का शौचालय चोक पड़ा है। काफी परेशानी हो रही है। इससे पूरे सेंटर में बदबू आ रही है। सफाई कर्मचारी आता ही नहीं। ऐसे में सभी लोगों ने स्कूल भवन परिसर में पेड़ के नीचे चारपाइयां डाल रखी हैं। किसी तरह यहां समय पूरा कर रहे हैं। स्थानीय होने से भोजन और पानी इनके घरों से ही आ रहा है। प्रधान प्रतिनिधि मुईनुद्दीन का कहना है कि हैंडपंप और शौचालय की व्यवस्था सही कराई जा रही है। वोल्टेज न मिलने से पंखे भी हल्के चल रहे हैं। इसके बारे में पावर कॉरपोरेशन को अवगत कराया गया है।
तीन क्वारंटीन सेंटर पड़े हैं खाली
प्रशासन की ओर से कादरचौक ब्लॉक के चौड़ेरा, असरासी और कादरचौक में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। अब तक यहां किसी को नहीं रखा गया है। दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले हजारों ग्रामीणों को यूं ही थर्मल स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटीन कर दिया गया। होम क्वारंटीन के चलते ही जिले में एक साथ 17 कोरोना पॉजीटिव मिलने के बाद कोरोना बम फूट चुका है।
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बोले मजदूर
सेंटर की हालत बेहद खराब है। हैंडपंप न होने से प्यास से बुरा हाल हो जाता है। अगर यहां हमारे घर न होते तो शायद प्यासे ही मर जाते। शौचालय भी खराब पड़ा है। इससे बदबू के मारे बुरा हाल हो जाता है। - इकरार
इसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अधिकारी यहां आकर हर बार आश्वासन दे जाते हैं। लगता है उच्च अधिकारियों तक हमारी बात ही नहीं पहुंच रही। समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए। - किशवर
सचिव को हैंडपंप ठीक कराने व शौचालय की सफाई के लिए कहा गया है। व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया जा रहा है। भमुइया स्कूल में जिन 25 लोगों को रखा गया है वह होम क्वारंटीन हैं। गांव में ही स्कूल है, ऐसे में उनके घरों से खाना आ रहा है। क्वारंटीन लोगों को परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। समस्याओं को जल्द सुलझाया जाएगा। - गोपाल प्रसाद कुशवाह, बीडीओ
स्कूल में जो भी कमी है। उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा। वहां पर साफ-सफाई कराई जाएगी। वहां पर रुकने वालों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - पारस नाथ मौर्य, एसडीएम
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