बदायूं। कैंसर के मरीजों के लिए जिले में सिर्फ लक्षणों के आधार पर प्राथमिक उपचार की ही सुविधा है। वह भी जांच में इसकी पुष्टि नहीं होने तक। यहां अलग से कैंसर के इलाज की कोई सुविधा नहीं है और न ही इसका आंकड़ा है कि जिले में कितने मरीज कैंसर से पीड़ित हैं। इसलिए मरीज बड़े शहरों में जाकर ही अपना इलाज करा रहे हैं।
कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को जागरूक और शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। महीने में एक या दो मरीज कैंसर के सामने आते हैं, लेकिन जिले में कैंसर की जांच की सुविधा नहीं है। यहां मरीज तब तक इलाज कराता है, जब तक उसको जांच में कैंसर घोषित न कर दिया जाए। जांच भी बड़े शहरों में कराई जाती हैं। कैंसर का पता लगते ही मरीज के तीमारदार खुद ही अच्छे मेडिकल कॉलेज ले जाकर इलाज कराना मुनासिब समझते हैं।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में कैंसर के मरीजों के इलाज को न तो कोई विशेषज्ञ डॉक्टर है और न ही होने वाली जांचों के लिए मशीनें हैं। यहां मरीजों का इलाज जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज में तैनात फिजिशियन और सर्जन डॉक्टर की देखरेख में किया जाता है। गंभीर हालत में कैंसर के मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश वर्मा का कहना है कि कैंसर के मरीजों का पहली और दूसरी स्टेज तक ही जिला अस्पताल में इलाज संभव हो सकता है। आखिरी स्टेज पर मरीज को विशेषज्ञ डाॅक्टर की जरूरत होती है ऐसे में उसको रेफर करने से अच्छा और कोई चारा नहीं होता। महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के अधिक केस सामने आते हैं।
ये लक्षण नजर आएं तो न करें नजरअंदाज
- लगातार बिना किसी कारण वजन तेजी से गिरना।
- पर्याप्त आराम के बाद भी थकान और कमजोरी महसूस करना।
- लगातार शरीर के किसी हिस्से में दर्द रहना।
- उल्टी, खासी, मल-मूत्र के साथ खून आना।
- त्वचा के रंग में बनावट या परिवर्तन दिखाई देना।
- शरीर के किसी भाग में दर्द रहित गांठ का बनना।
यदि समय पर कैंसर की पहचान हो जाए तो इसका उपचार और रोगी की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर के कई उपचार उपलब्ध हैं। कैंसर का प्रकार और अवस्था जैसी स्थितियों के आधार पर दवाओं, थेरेपी, सर्जरी के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है। -डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज