सिविल लाइंस स्थित शिवदेवी सरस्वती विद्या मंदिर में चल रहे प्राइमरी शिक्षा वर्ग के दूसरे दिन भारत के गौरवशाली अतीत और मानचित्र परिचय के माध्यम से अखंड भारत की जानकारी मुहैया कराई गई। भारत के गौरवशाली इतिहास की चर्चा करते हुए सह प्रांत संपर्क प्रमुख राज कुमार ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत शिक्षा, व्यापार, विज्ञान, चिकित्सा आदि प्रत्येक क्षेत्र में विश्व का सिरमौर रहा है। शून्य एवं दशमलव का अविष्कार भी भारत वर्ष में हुआ। बताया कि सन् 1947 तक हमारी विश्व व्यापार में करीब 30 प्रतिशत भागीदारी थी। धन धान्य से पूर्ण होने के कारण ही इसे सोने की चिड़िया कहा जाता था। मानक चंद्र गंगवार, सत्यप्रकाश मौर्य, मुनीश कुमार, ललित कुमार, शुभेंद्र, राजकुमार सिंह सेंगर आदि मौजूद रहे।