किसानों का करोड़ो रुपए दबाकर बैठे हैं सुगर मिल
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मेहनत करके गन्ना पैदा करने वाले किसानों को यह नहीं मालूम कि उनकी फसल को किस भाव में बेचा रहा है। जिले में तीन गन्ना क्रय केंद्र शुरू हो चुके हैं, जिन किसानों ने बाकायदा गन्ने की तौल शुरू कर दी है। ऐसे में किसान पशोपेश में है कि आखिर उसकी फसल की बिक्री किस रेट में हुई है।
गन्ना सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाली छह चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई की जाती है। इसमें जिले में स्थित सहकारी चीनी मिल शेखूपुर और बिसौली चीनी मिल सहित चार अन्य चीनी मिलों को गन्ना दिया जाता है। इसके लिए 90 गन्ना क्रय केंद्रों का आवंटन किया गया था, जिसमें बरेली जिले की फरीदपुर स्थित द्वारिकेश चीनी मिल के गुलडिय़ा में स्थित तीन गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ने की खरीद शुरू हो गई है। गेहूं की फसल उगाने के लिए खेत खाली करने की जिम्मेदारी में लगे किसानों ने मजबूरी में गन्ने को बेचना शुरू कर दिया।
अन्य चीनी मिलों में पेराई शुरू होने से पहले गन्ना खरीद शुरू हो जाएगी। ऐसे में बिना मूल्य जाने ही किसान का गन्ना बेचा जाएगा। नोट बंदी की वजह से खुले बाजार में भी गन्ने का मूल्य अभी तक तय नहीं हो सका है। इससे किसानों के पास दूसरा कोई चारा भी नहीं बचता है, तो मिलों को गन्ना देना शुरू कर दिया है।
शासन से ही गन्ना मूल्य तय नहीं किए गए हैं। स्थानीय स्तर से इस संबंध में किसी समस्या का हल नहीं हो सकता है। किसान धैर्य रखे जल्द ही गन्ना मूल्य तय कर दिए गए जाएंगे। इसके बाद किसानों के बैंक खातों में उसी हिसाब से धनराशि भेजी जाएगी।
दिलीप सैनी, जिला गन्ना अधिकारी
गुलड़िया में किसानों से मिले चीनी मिल जीएम
गुलड़िया। गन्ना मूल्य तय न होने से पहले क्षेत्र के क्रय केंद्रों पर गन्ना खरीद शुरू हो चुकी है। किसानों के बीच में पहुंचकर फरीदपुर चीनी मिल के जीएम अनिल कुमार ने कहा कि वे लोग ईमानदारी के साथ गन्ना तौल कराएं। किसानों को कोई भी परेशानी हो तो उनसे शिकायत कर सकते हैं, उसका निस्तारण किया जाएगा।