जिले में गंगा, रामगंगा जैसी बड़ी नदियों के अलावा आधा दर्जन और नदियां हैं। बाढ़ प्रभावित इस जिले में विकास कार्यों के साथ बाढ़ बचाव के कार्य बेहद जरूरी हैं। इस साल बाढ़ बचाव के लिए दो करोड़ रुपये इतने विलंब से मिले कि इस वर्ष काम शुरू भी हो जाए, तो पूरा नहीं हो सकेगा। बाढ़ खंड पर पिछले वर्ष के तीन बड़े काम हैं। जिन्हें निपटाने में यह वर्ष तो लग ही गया आगामी वर्ष भी लगेगा। शासन बाढ़ सुरक्षा को धन तब देता हैं जब बाढ़ का समय सिर पर आ जाता है।
बाढ़ खंड के तीन महत्वपूर्ण काम हैं। जो पिछले वर्ष के स्वीकृत हैं। पूरा वित्तीय वर्ष इसमें लग चुका है और अगले वित्तीय वर्ष में भी काम जारी रहेगा। इन कार्यों में संभल और बरेली जिले के काम बदायूं बाढ़ खंड कर रहा है।
1-नहर: बरखेड़ा ब्रांच
39.600 किमी खुदाई कार्य
लागत
प्रथम ब्रांच- 6.76 करोड़
द्वितीय ब्रांच- 5.19 करोड़
तृतीय ब्रांच-7.47 करोड़
2-ईसमपुर बांध (संभल जिला से जुड़ा कार्य)
लंबाई-11 किमी
कुल लागत- 7.83 करोड़
3-लेफ्ट एफलक्स बांध (बरेली जिला से जुड़ा कार्य)
लंबाई- 12.900 किमी
लागात-19.32 करोड़
समय से नहीं मिला बाढ़ बचाव को धन
पिछले वर्षों का रिकार्ड देखें तो बाढ़ खंड को बाढ़ बचाव के कार्यों के लिए तब धन मिलता है, जब बाढ़ का समय आ जाता है और काम बाढ़ से पहले पूरा होना मुश्किल हो जाता है। वर्ष 2010 के बाद बाढ़ ने बदायूं को अधिक परेशान नहीं किया है, लेकिन समय से धन मिले तो बाढ़ बचाव के कार्य भी गुणवत्तापरक हो सकते हैं। इस वर्ष दो करोड़ रुपये सरोता कटान के लिए मिले हैं। जो अभी मार्च शुरू में प्राप्त हुए। आधे जून से ही बाढ़ सीजन माना जाता है। इस हिसाब से भी केवल ढाई माह काम को बचते हैं। ऐसे में काम पूरा करना एक चुनौती होती है।
बाढ़ बचाव के लिए प्रस्ताव पहले ही चले जाते हैं। प्रयास रहते हैं समय पर धन मिले। विलंब से भी धन मिलता है तो काम तेज कर यह महत्व के कार्य पूरे करने होते हैं। बाढ़ बचाव ही उनके विभाग का महत्वपूर्ण कार्य है। - डीके जैन, एक्सईएन, बाढ़ खंड