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फखरुद्दीन अली चुने गए पांचवें राष्ट्रपति तब शेखूपुर में मना था जश्न

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शेखूपुर स्थित आबिदा बेगम के पिता और देश के पांचवें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के ससुर की कोठी? - फोटो : BADAUN
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बदायूं। राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही बदायूं से सटे गांव शेखूपुर के बुजुर्गों की यादें भी ताजा हो गईं थीं। जिले में काफी कम लोग ही जानते होंगे कि भारत के पांचवें राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की ससुराल बदायूं में थी। अगस्त 1974 में फखरुद्दीन अली अहमद जब राष्ट्रपति चुने गए तो शेखूपुर में भी खुशी मनाई गई। जून 1975 में जब देश में इमरजेंसी लगी तब शेखूपुर पर खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा एजेंसियों की भी खास नजर रहती थी। इंदिरा गांधी शासनकाल में उन्होंने ही देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी।
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फखरुद्दीन अली अहमद अगस्त 1974 से फरवरी 1977 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। पद पर रहते हुए ही उनका निधन हो गया था। उनके कार्यकाल में ही देश में जून 1975 से मार्च 1977 तक इमरजेंसी रही थी। फखरुद्दीन अली अहमद की शादी शेखूपुर के सुल्तान हैदर जोश की बेटी आबिदा बेगम के साथ हुई थी। सुल्तान हैदर जोश अंग्रेजी हुकूमत में डिप्टी कमिश्नर थे। आबिदा बेगम का जन्म बदायूं में ही हुआ। उनके एक भाई एहसान हैदर थे। एहसान हैदर की कम उम्र में ही मौत हो गई थी। आबिदा की बहन महमूदा बेगम अलीगढ़ गर्ल्स इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य रहीं। उनका परिवार अलीगढ़ में ही रहता है। फखरुद्दीन अली के निधन के बाद आबिदा बेगम 1980 से 1984 तक बरेली से सांसद भी रहीं। उन दिनों उनका काफी बार शेखूपुर जाना जाना होता था। साल 2003 में उनका भी इंतकाल हो गया।
आबिदा का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा तो बदायूं में हुई, लेकिन उनके पिता की अलग-अलग जिलों में तैनाती रहती थी तो भाई-बहन पिता के साथ ही रहते थे। परिवार के अन्य लोग शेखूपुर में रहते थे। आबिदा बेगम की भतीजियां शौकत जहां और नुसरत जहां आज भी चाकाचौंध से दूर शेखूपुर स्थित कई बीघा में फैली कोठी में रहती हैं। शौकत जहां 2000 से 2005 तक शेखूपुर की प्रधान भी रह चुकी हैं। दोनों बहनें काफी बुजुर्ग हो चुकी हैं उन्होंने शादी नहीं की है। कई बीघा में फैली कोठी अब जर्जर हो चुकी है। कई हिस्से ढह चुके हैं, लेकिन कोठी की बुलंदी और कहानियां अब भी बुजुर्गों की जुबां पर हैं।
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आबिदा के भाई रह चुके हैं इस्लामिया कॉलेज के प्रबंधक
डिप्टी कमिश्नर रहे सुल्तान हैदर जोश के पिता की कोठी का जिले में बड़ा नाम था। बुजुर्ग कहते हैं कि आधा शेखूपुर इसी कोठी की मिल्कियत में बसा है। सुल्तान हैदर जोश के भतीजे इकरामउद्दीन हैदर उर्फ कदीर मियां इस्लामियां इंटर कॉलेज के प्रबंधक रहे चुके हैं। उनकी बेटियां शौकत जहां और नुसरत जहां अब भी प्रबंधन समिति में हैं। वह बताती हैं कि फखरुद्दीन अली अहमद के राष्ट्रपति रहते वह कई बार आबिदा बेगम से मिलीं। परिवार के लोगों का राष्ट्रपति भवन जाना और वहां ठहरना भी हुआ। बरेली से सांसद रहने के दौरान कई बार आबिदा बेगम शेखूपुर आया करती थीं।
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बुजुर्गों ने बताए संस्मरण
फखरुद्दीन अली अहमद को जब देश का राष्ट्रपति चुना गया था तब शेखूपुर में भी जश्न हुआ था। उनका जब इंतकाल हुआ तो यहां भी लोग गमज़दा हो गए थे। इमरजेंसी के दौरान शेखूपुर में काफी सुरक्षा रहती थी। राष्ट्रपति रहते फखरुद्दीन अली अहमद कभी शेखूपुर तो नहीं आए लेकिन परिवार के लोगों का आना-जाना रहता था।
-अबरार हुसैन, रिटायर्ड शिक्षक
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शेखूपुर ऐतिहासिक जगह है। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि देश के मुगल बादशाह शाहजहां की पत्नी मुमताज महल की एक बहन परबर बेगम की ससुराल भी शेखूपुर में थी। फखरुद्दीन अली अहमद देश के राष्ट्रपति चुने गए तब शेखूपुर में और कोठी में कई दिन जश्न चला था। उनके ससुराल के लोग अब भी यहां रहते हैं।
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- अब्दुल रब खां, बुजुर्ग
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