बिसौली की मस्जिद में नमाज के बाद तकरीर करते मौलाना। संवाद
बिसौली। रमजान के तीसरे जुमे को नगर व क्षेत्र में लोगों ने अकीकत के साथ नमाज अदा की। रोजेदारों ने मुल्क में अमन-चैन, कौम की तरक्की व खुशहाली के लिए दुआएं कीं। मस्जिदों में उलेमाओं ने रमजान की अहमियत और रोजा रखने की फजीलत बयां की।
नफ़ीस मस्जिद में इमाम हाफिज मजहर खान ने नमाज अदा कराई। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहना ही नहीं, बल्कि रूह को पाक करने और नेकी के रास्ते पर चलने की एक इबादत है। उन्होंने कहा- रमजान का दूसरा अशरा इंसान को अपने गुनाहों से सच्चे दिल से तौबा करने का मौका देता है। इस अशरे में दुआ के साथ ही उन्होंने पांचों वक्त की नमाज की पाबंदी, कुरान की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद करने की नसीहत दी। हाफिज मजहर साहब ने कहा कि यह महीना सब्र, त्याग, आत्मसंयम, इंसानियत, भाईचारे और नेक रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। संवाद