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Budaun News: उसूलों में व्यावहारिक, गंभीरता से निपटाती थीं दीवानी के मुकदमे

Sun, 04 Feb 2024 04:07 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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बदायूं। महिला जज की मौत से तमाम लोग स्तब्ध हैं। उन्हें जानने वाले तमाम वकीलों का कहना है कि महिला जज व्यवहारिक थीं और दीवानी के मामले गंभीरता पूर्वक सुनती थीं। उनके किसी मामले में कोई शिकायत नहीं आई। साथी महिला जज भी उनकी तारीफ करती नजर आईं।
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महिला जज ज्योत्सना राय दीवानी के मुकदमों की सुनवाई करती थीं। उनके कोर्ट में मुकदमा लड़ने वाले वकीलों का कहना है कि महिला जज मृदुभाषी और व्यवहारिक थीं। उन्हें देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह अपनी निजी जिंदगी से परेशान थीं। वह शुक्रवार को भी न्यायालय आई थीं। उन्होंने तमाम मुकदमों की सुनवाई की थी। शाम तक अपनी कोर्ट में बैठीं थीं और समय पूरा होने के बाद न्यायालय से गईं थीं। तब भी उनके चेहरे पर कोई शिकन या कोई परेशानी जैसा भाव नजर नहीं आया। उनकी मौत को लेकर तमाम वकील हैरान हैं। तमाम वकील उनके आवास पर भी पहुंचे और सुबह लेकर शाम तक आवासीय परिसर में खड़े रहे। वह एक-दूसरे से उनके बारे में जिक्र करते नजर आए। साथी महिला जज भी एक-दूसरे से कहती नजर आईं कि कभी ज्योत्सना ने अपनी परेशानी के बारे में जिक्र नहीं किया और न ही वह कभी परेशान जैसी दिखाई दीं।
सुबह से भीड़ से भरा रहा आवासीय परिसर
महिला जज की मौत की खबर सुबह करीब 10 बजे सार्वजनिक हुई थी। हालांकि अनुमान लगाया जा रहा है कि उनका शव रात से फंदे से लटका हुआ था। सुबह जैसे ही कचहरी खुली कि महिला जज की मौत की खबर फैलना शुरू हो गई। वकील कोर्ट जाने की बजाय जजों की अवासीय कॉलोनी की ओर दाैड़ पड़े। फिर अधिकारियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले कोतवाली पुलिस, फिर सिविल लाइंस इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे। सीओ सिटी आलोक मिश्रा, एसपी सिटी अमित किशोर श्रीवास्तव और एसएसपी आलोक प्रियदर्शी पहुंच गए। कुछ मिनटों बाद ही डीएम मनोज कुमार पहुंचे। इससे पहले कई जज और जिला जज पंकज अग्रवाल पहुंच गए थे। सुबह से लेकर शाम तक अधिकारियों के आने-जाने का क्रम लगा रहा। शाम शात बजे के बाद कहीं भीड़ कम हुई।
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पेशकार को बुलाकर चेक कराया सुसाइड नोट
महिला जज के कमरे से सुसाइड नोट मिलने के बाद एसएसपी आलोक प्रियदर्शी ने उनके पेशकार को मौके पर बुलाया था। उन्हें सुसाइड नोट दिखाया गया और महिला जज के हस्ताक्षर दिखाए गए। इस दौरान पेशकार ने महिला जज के ही हस्ताक्षर और लिखावट बताई। इस बताया जा रहा है कि मौके से मिला सुसाइड नोट फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। उसकी जांच कराई जाएगी।


सुसाइड नोट में लिखा: मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं
सुसाइड नोट के बारे में कोई अधिकारिक रूप से बयान देने को तैयार नहीं है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि महिला जज ज्योत्सना राय ने सुसाइड नोट हिंदी और अंग्रजी दोनों भाषाओं में लिखा है। हिंदी में लिखा है- 'मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं है, तुम्हें विवेचना करनी है तो कर लेना। तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा।' वहीं अंग्रेजी में में 'फीलिंग एलोन' और 'फीलिंग अनहैप्पी' भी लिखा गया है। सूत्रों के अनुसार ये भी लिखा है कि मेरा अंतिम संस्कार अयोध्या में सरयू तट पर करना। हालांकि उनका सुसाइड नोट परिवार वालों के गले नहीं उतर रहा है। न्यायालय से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर जज किस परेशानी से जूझ रहीं थीं। उन्हें क्या दिक्कत थी। उन्होंने कभी परिवार वालों या अपने साथियों से इसका जिक्र नहीं किया था। एक बात और सामने आई है कि कमरे में 2021 की एक डायरी भी मिली है, इसमें जनवरी की 29 तारीख तक के पेज फटे हुए हैं। बताते हैं कि यह पन्ने भी हाल में फाड़े गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात जज ने अपनी मां से बात भी की थी और तब वह खुश बताई गई थीं। इस बात का जिक्र उनके पिता की ओर से दी गई तहरीर में भी है।

खरगोश पालने और पौधे लगाने की शौकीन थीं महिला जज

महिला जज के नजदीकी लोगों का कहना है कि वह खरगोश पालने और पौधे लगाने की शौकीन थी। कमरे को भी उन्होंने अच्छी तरह सजा रखा था और सजावट की बहुत शौकीन थीं। उन्होंने अपने आवास के बरामदे में कई गमले लगा रखे हैं। वह सुबह-शाम पौधों को पानी देती थीं। अपने खरगोशों का भी ख्याल रखती थीं। जब वह न्यायालय जाती थीं तो उन्हें चारा आदि डालकर आवास से निकलती थीं। वापस आने पर उनकी देखभाल करती थीं। सुसाइड नोट में उन्होंने खरगोशों का ख्याल रखने की बात भी लिखी है।

दूसरा गेट है बहुत असुरक्षित
मेन गेट के अलावा कॉलोनी का एक गेट रजिस्ट्री कार्यालय की तरफ भी है, जिससे पक्की सीढि़यां आवासीय परिसरों में बने छत पर जाती हैं। छत पर गेट लगा था जो आसानी से खुल रहा था। लोगों का कहना है कि यह गेट खुलता रहता होगा, नहीं तो इसमें जंग लग जाती। हालांकि पुलिस का कहना है कि जिस कमरे में लाश मिली है वह हर तरफ से बंद है।
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