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Budaun News: बिजली गुल... चार घंटे के बजाय आठ घंटे में हो रही डायलिसिस

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जिला अस्पताल में डायलिसिस कराते मरीज। संवाद
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बदायूं। बिजली गुल होने पर डायलिसिस में चार घंटे के स्थान पर आठ घंटे लग रहे हैं। मरीजों को डायलिसिस के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं भवन हैंडओवर न होने से डायलिसिस यूनिट को एक कमरे में संचालित किया जा रहा है। एक दिन में 10 से 15 मरीजों को इसका लाभ मिल सकता है, लेकिन यूनिट का विस्तार न होने से दो से तीन मरीजों को ही इसका लाभ मिल पा रहा है।
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शहर के हुसैनी गली के रहने वाले संजय रस्तोगी मंगलवार दोपहर 12.15 बजे डायलिसिस करा रहे थे। पंद्रह मिनट में पांच बार ट्रिपिंग हुई। संजय रस्तोगी ने बताया कि सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराने अस्पताल आते हैं। हर बार चार के स्थान पर आठ घंटे लग जाते हैं। मई व जून में तो यूनिट पूरी तरह से बंद रही, मजबूरी में बाहर जाकर डायलिसिस करानी पड़ी। एक बार में तीन से चार हजार रुपये का खर्चा आ रहा था।
झंडपुर निवासी धर्मवीर और उझानी निवासी मोहम्मद उमर का भी यही कहना था कि डायलिसिस कराने में पूरा दिन खराब हो रहा है। सप्ताह में तीन दिन तो अस्पताल में ही गुजर रहे हैं। ऐसे में हालत ठीक होने के बजाय और बिगड़ रही है।
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साल 2020 में डायलिसिस यूनिट को मंजूरी मिलने के बाद करीब 80 लाख रुपये की लागत से इसके लिए भवन का निर्माण कराया गया। जनवरी 2022 में निर्माण शुरू हुआ और छह माह में भवन निर्माण पूरा होना था, लेकिन 11 महीने लगे। दिसंबर 2023 में भवन का निर्माण पूरा हो गया, लेकिन सात महीने में अधिकारी भवन हैंडओवर कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं करा सके। सिर्फ पत्राचार हो रहा है।
सीएमएस ने सीएमओ और सीडीओ को पत्र भेजे हैं, लेकिन अभी तारीख तय नहीं हुई। भवन हैंडओवर करने के लिए सीडीओ की अध्यक्षता वाली कमेटी को निरीक्षण करना है। कमेटी की सहमति पर ही भवन स्वास्थ्य विभाग को मिल पाएगा। इसके बाद यूनिट का संचालन हो सकेगा।

सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराते हैं 20 मरीज
किडनी मरीजों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार सप्ताह में तीन बार, दो बार और एक बार डायलिसिस करानी पड़ती है। इस समय सेंटर पर सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराने वाले 20 मरीज हैं। कुल संख्या 50 है।


निजी सेंटर पर खर्च करने होते हैं तीन हजार
सरकारी डायलिसिस सेंटर पर निशुल्क डायलिसिस होती है, जबकि प्राइवेट सेंटरों पर दो से तीन हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। दवाओं का खर्च अलग रहता है।


भवन तैयार है, लेकिन हस्तांतरित नहीं हो सका है। इसके लिए सीडीओ की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम बनी हुई है। निरीक्षण करने के बाद भवन हस्तांतरित किया जाना है। सीएमओ को इस मामले की जानकारी देकर जल्द भवन हस्तांतरित कराने को कहा गया है। इसके बाद डायलिसिस यूनिट को भवन सौंप दिया जाएगा। मरीजों को फिर कोई दिक्कत नहीं आएगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस


यह है हाल
जिले में किडनी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बढ़ती संख्या के चलते मरीजों को अस्पताल में डायलिसिस का स्लॉट भी खाली नहीं मिल पा रहा है। क्योंकि यहां एक मरीज को छह से आठ घंटे डायलिसिस कराने में लग रहे हैं। मरीज स्लॉट खाली होने का इंतजार कर रहे हैं या फिर प्राइवेट सेंटरों पर जाने को विवश हो रहे हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल यूनिट में डायलिसिस के 22 मरीज रेग्युलर हैं। मरीजों की संख्या 50 के पार है। दो माह पूरी तरह से यूनिट बंद रहने से मरीज बाहर डायलिसिस कराने लगे।





जिला अस्पताल में खराब 33 केवीए सब स्टेशन ठीक हुआ, मिलेगी राहत



- शासन ने दस लाख रुपये किए थे मंजूर, अब काम पूरा कर सब स्टेशन किया संचालित



संवाद न्यूज एजेंसी



बदायूं। छह माह बाद जिला अस्पताल का सब स्टेशन ठीक हो गया है। अब जिला अस्पताल में मरीजों को बिजली की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा।



जिला अस्पताल में करीब छह माह पहले बिजली लाइन में आग लगने से पूरी केबल जल गई थी। अस्पताल को शहर के ट्रांसफार्मर से जोड़कर आपूर्ति शुरू कराई गई थी। इससे घंटों तक बिजली गुल होना आम बात हो गई थी। मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सीएमएस ने शासन को प्रस्ताव भेजा था।



शासन ने एस्टीमेट के आधार पर दस लाख रुपये की मंजूरी दे दी थी। कार्य शुरू हुआ, करीब 28 दिन तक काम चलने के बाद सोमवार शाम को उसे शुरू करा दिया गया। सहायक अभियंता विद्युत बरेली संदीप सक्सेना ने बताया सब स्टेशन को ठीक करा दिया गया है। काम पूरा होने के बाद उसको चालू कर दिया गया है। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को अब बिजली की समस्या से निजात मिल सकेगी।







जिला अस्पताल की बिजली को लेकर बहुत दिक्कत हो रही थी। शासन ने इस मामले को प्राथमिकता पर लिया। एस्टीमेट को मंजूरी दी तब कहीं जाकर अब सब स्टेशन ठीक हो सका है। मरीजों को अब 24 घंटा बिजली उपलब्ध रहेगी। - डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल

जिला अस्पताल में डायलिसिस कराते मरीज। संवाद

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