बदायूं/ उझानी। देर रात से बृहस्पतिवार सुबह तक हुई वर्षा ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है। खेतों में पानी भर जाने से आलू को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। पहले से ही पिछेती झुलसा की चपेट में रहे आलू की पैदावार प्रभावित होगी। इसके साथ ही सरसों और टमाटर समेत सब्जी फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
पिछले महीने घने कोहरे की वजह से आलू की फसल पिछेती झुलसा की चपेट में आ गई थी। अधिकांश रकबे में झुलसा ने आलू के पौधों की पत्तियों को झुलसा दिया था। इसके बाद अब वर्षा का पानी खेतों में भर गया है। बिसौली, सहसवान, उझानी, दातागंज और अलापुर क्षेत्र में आलू की फसलें सर्वाधिक प्रभावित हुई हैं।
किसान प्रेमपाल ने बताया कि बारिश एक-दो दिन और होती है तो आलू का कंद खेतोंं में ही सड़ जाएगा। इसका सीधा प्रभाव पैदावार पर पड़ेगा। इसी तरह सरसों, टमाटर, मिर्च, पत्ता गोभी पर भी बारिश का असर पड़ा है। बारिश के दौरान तेज हवा के झोकों से टमाटर के पौधे गिर गए हैं।
यहां बता दें कि सरसों की फली में दाना पकने के दौरान बूंदाबांदी ज्यादा नुकसानदायक रहती है। ऐसे में धूप के अभाव में सरसों की फली के अंदर दाना सड़ सकता है। इधर, मौसम विज्ञानियों की ओर से बारिश के दौरान ओलावृष्टि के संकेत दिए जा रहे हैं। ओलावृष्टि सब्जियों समेत सभी फसलों के घाातक साबित होगी।
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बहुरे गेहूं के दिन, अच्छी पैदावार के संकेत
मौसम में बदलाव के साथ अचानक बारिश ने गेहूं की फसल के अच्छे दिनों की शुरुआत हो गई है। बारिश होने से गेहूं के खेतों में जहां हरियाली लौट आई है, वहीं पैदावार भी बंपर होने की उम्मीद बन गई है। किसान नेमचंद्र ने बताया कि पिछले चार-छह दिनों से सिंचाई की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में गेहूं की एक बार की सिंचाई बच गई है।
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बुधवार देर रात से बृहस्पतिवार सुबह तक बारिश होने से गेहूं की फसल को काफी फायदा रहेगा। आलू, सरसों और टमाटर को नुकसान हुआ है। किसानों को आलू के खेतों से बारिश के पानी के निकास की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे आलू सड़ने से बच जाएगा।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
झुलसा रोग की चपेट में आलू की फसल।